
UttarakhandNews : GenderRatio : BetiBachao : Navratri2026 : DehradunNews : GirlChild : SocialIssue : उत्तराखंड में बेटियों की घटती संख्या ने चिंता बढ़ा दी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार राज्य के ज्यादातर जिलों में लिंगानुपात लगातार कम हो रहा है। ऐसे में विशेषज्ञों का कहना है कि नवरात्र जैसे पावन पर्व के अवसर पर समाज को बेटियों के सम्मान और उनकी सुरक्षा का संकल्प लेने की जरूरत है।
हाल ही में हॉस्पिटल इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम (HIMS) द्वारा जारी आंकड़ों में राज्य के सभी जिलों के लिंगानुपात की स्थिति सामने आई है। इन आंकड़ों के अनुसार उत्तराखंड के 13 जिलों में से 11 जिलों में प्रति एक हजार लड़कों पर 950 से भी कम लड़कियां दर्ज की गई हैं।
तीन जिलों में स्थिति और गंभीर
आंकड़ों के मुताबिक राज्य के तीन जिलों में लिंगानुपात 900 से भी नीचे पहुंच गया है। यह स्थिति सामाजिक संतुलन के लिहाज से गंभीर मानी जा रही है। जब इन आंकड़ों की तुलना राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (NFHS-5) के वर्ष 2020-21 के आंकड़ों से की गई…तो पता चला कि कई जिलों में हालात पहले से ज्यादा खराब हो गए हैं। उस समय जिन जिलों में लिंगानुपात बेहतर था….वहां भी अब गिरावट दर्ज की जा रही है।
पलायन भी एक बड़ा कारण
अधिकारियों के अनुसार पहाड़ी क्षेत्रों से हो रहा पलायन भी लिंगानुपात में गिरावट का एक प्रमुख कारण बन रहा है। रोजगार और बेहतर सुविधाओं की तलाश में बड़ी संख्या में लोग गांवों से शहरों की ओर जा रहे हैं। कुछ इलाकों में यह भी देखा गया कि बड़ी संख्या में युवा पुरुष सेना या रोजगार के लिए बाहर चले जाते हैं…जिससे स्थानीय स्तर पर लिंगानुपात प्रभावित होता है।
जागरूकता बढ़ाने की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि समाज में बेटियों को लेकर सकारात्मक सोच को बढ़ावा देना बेहद जरूरी है। इसके लिए सरकार और सामाजिक संगठनों की ओर से जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं। नवरात्र जैसे पर्व जहां देवी शक्ति की पूजा की जाती है ऐसे अवसर पर समाज को बेटियों के सम्मान और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए आगे आने की जरूरत बताई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते इस मुद्दे पर गंभीरता से काम नहीं किया गया तो आने वाले समय में सामाजिक संतुलन पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है।






