
Pithoragarh News : Fish Insurance Scheme : Mukhyamantri Matsya Sampada Yojana : Fisheries Department Uttarakhand : Fish Farmers Relief : सीमांत जिले के मत्स्य पालकों के लिए यह खबर राहत और भरोसे की नई शुरुआत लेकर आई है। जिले में पहली बार मछलियों का बीमा किया गया है। केंद्र व राज्य सरकार की मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत शुरू हुई इस पहल से अब तक 120 मत्स्य पालक जुड़ चुके हैं।
बीमारी, तालाब टूटने या दैवीय आपदा के कारण मछलियों के मरने से होने वाला पूरा नुकसान मत्स्य पालकों को स्वयं उठाना पड़ता था। बीमा व्यवस्था लागू होने के बाद अब ऐसी स्थिति में बीमा राशि के माध्यम से क्षतिपूर्ति की जाएगी, जिससे उनकी आजीविका को मजबूत सहारा मिलेगा।
इस योजना की खास बात यह है कि अब केवल मत्स्य पालक का ही नहीं…बल्कि मछलियों के साथ-साथ तालाब का भी बीमा किया जा रहा है। मत्स्य विभाग ने इसके लिए यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के साथ अनुबंध किया है। सीमांत जिले में 200 से अधिक लोग मत्स्य पालन से जुड़े हैं और बीमा योजना को लेकर उनमें खासा उत्साह देखा जा रहा है।
मत्स्य विभाग के अनुसार बीमा की कुल राशि 13629 रुपये निर्धारित की गई है। इसमें से 90 प्रतिशत प्रीमियम मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत सरकार वहन करेगी…जबकि मत्स्य पालकों को केवल 10 प्रतिशत यानी 1362 रुपये का भुगतान करना होगा।
पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य
मत्स्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि मछली और तालाब का बीमा कराने के लिए राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (एनएफडीबी) के पोर्टल पर पंजीकरण जरूरी है। वर्तमान में बीमा आवेदन की प्रक्रिया जारी है।
उत्पादकों को मिला लाभ
योजना का लाभ मिलना शुरू हो चुका है। मुनस्यारी क्षेत्र के दो मत्स्य पालकों को कुल 4 लाख 18 हजार 900 रुपये की बीमा राशि प्रदान की गई है।
रूईस पाटा निवासी जगदीश मेहता को 21 हजार ट्राउट मछली बीज नष्ट होने पर उन्हें 3.17 लाख रुपये की भरपाई मिली।
जैती निवासी लक्ष्मण कुमार को 1450 ट्राउट मछलियों के नुकसान पर 1.18 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति की गई।
जिला मत्स्य अधिकारी डॉ. रमेश चलाल ने कहा कि मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना मत्स्य पालकों के आर्थिक नुकसान को कम करने में सहायक है। विभाग में ही किस्त जमा कर बीमा कराया जा सकता है और अधिक से अधिक मत्स्य पालकों को इस योजना का लाभ उठाना चाहिए।






