
NAINITAL: Mohammad Akarm: RTI: जिलाधिकारी कार्यालय में तैनात प्रधान सहायक मोहम्मद अकरम द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के कथित दुरुपयोग का मामला सामने आया है। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने इसे गंभीरता से लेते हुए संबंधित कर्मचारी की औपचारिक भर्त्सना की है और प्रशासनिक आधार पर उनका जिला मुख्यालय से स्थानांतरण कर दिया गया है।
प्रकरण के अनुसार, प्रधान सहायक मोहम्मद अकरम ने अपने ही कार्यालय के विभिन्न पटलों से अत्यधिक मात्रा में सूचना आरटीआई के तहत मांगी थी। लोक सूचना अधिकारी ने सीमित मानव संसाधनों के बावजूद कई दिनों की मेहनत के बाद लगभग तीन हजार पृष्ठों की सूचना नि:शुल्क संकलित कर उपलब्ध कराई। इसके बावजूद संबंधित कर्मचारी ने बिना किसी वैध कारण के सूचना प्राप्त करने से इनकार कर दिया, जिससे कार्यालय की कार्यप्रणाली प्रभावित हुई।
जिलाधिकारी द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि सूचना का अधिकार अधिनियम पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का माध्यम है, न कि शासकीय संसाधनों, समय और श्रम के अनावश्यक अपव्यय का। आदेश में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों का उल्लेख करते हुए आरटीआई के विवेकपूर्ण और जिम्मेदार उपयोग पर जोर दिया गया है।
आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि एक लोक सेवक से, उसके पद और दायित्वों को देखते हुए, सामान्य नागरिक की तुलना में अधिक संयमित और उत्तरदायी आचरण की अपेक्षा की जाती है। अपने ही कार्यालय से अत्यधिक सूचना मांगकर उसे प्राप्त न करना उत्तराखंड सरकारी सेवक आचरण नियमावली के प्रावधानों के विपरीत माना गया है।
प्रशासन ने मोहम्मद अकरम को भविष्य में आरटीआई अधिनियम के प्रयोग और शासकीय कर्तव्यों के निर्वहन में विधिक मर्यादाओं का पालन करने की कड़ी चेतावनी दी है। साथ ही, प्रशासनिक कारणों से उनका जिला मुख्यालय से स्थानांतरण कर दिया गया है।






