
Dehradun, : Screen Time : Online Gaming Addiction : Child Mental Health : Parenting Awareness : तकनीक ने बच्चों के लिए सीखने के नए रास्ते खोले हैं…लेकिन उसका जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल अब गंभीर चिंता का कारण बनता जा रहा है। किताबों, खेल के मैदानों और दोस्तों के साथ बिताए जाने वाले समय की जगह अब मोबाइल स्क्रीन ने ले ली है। खासतौर पर ऑनलाइन गेम्स की लत बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल रही है।
हाल ही में गाजियाबाद में एक ऑनलाइन गेम की लत से जुड़ी दर्दनाक घटना ने अभिभावकों, शिक्षकों और काउंसलरों को झकझोर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ता स्क्रीन टाइम बच्चों के व्यवहार और मानसिक विकास को प्रभावित कर रहा है।
डा. मुकुल शर्मा, अध्यक्ष, इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ साइकोमेट्रिक काउंसलिंग ने कहा कि बच्चे चिड़चिड़े, जिद्दी और गुस्सैल होते जा रहे हैं। उनकी एकाग्रता घट रही है और मोबाइल पाने की चाहत में वे आक्रामक व्यवहार तक करने लगते हैं। उनका मानना है कि अभिभावकों का बच्चों को पर्याप्त समय न देना और उन पर निगरानी न रखना भी इस समस्या की बड़ी वजह है। माता-पिता ही बच्चों के पहले काउंसलर होते हैं।
डा. सोना कौशल गुप्ता, न्यूरो साइकोलोजिस्ट और सीबीएसई काउंसलर ने कहा कि कई बच्चे स्कूल जाने से कतराने लगे हैं….दोस्तों से मिलना-जुलना कम कर दिया है और अकेले रहना पसंद करने लगे हैं। ऐसे बच्चों के लिए मोबाइल ही भावनात्मक सहारा बनता जा रहा है। गेम्स के अलग-अलग स्तर पार करने की धुन में वे वास्तविक दुनिया से कटते चले जाते हैं…जो मानसिक रूप से नुकसानदेह स्थिति है।
अभिभावक इन बातों का रखें ध्यान
बच्चों के सामने मोबाइल का उपयोग कम से कम करें।
दो से तीन वर्ष तक के बच्चों को स्क्रीन से दूर रखें।
बच्चों से दोस्त की तरह व्यवहार करें, ताकि वे खुलकर अपनी बात कह सकें।
बच्चों को संस्कार, संस्कृति और सामाजिक मूल्यों से जोड़ें।
बच्चों के साथ भावनात्मक जुड़ाव बनाए रखें और यह जरूर देखें कि वे मोबाइल पर क्या और कितनी देर देख रहे हैं।
विशेषज्ञों का साफ कहना है कि बच्चों को समय दीजिए…..क्योंकि वही आपका भविष्य हैं।






