
UttarakhandHighCourt : GovernmentJobs : YouthEmployment : RecruitmentDelay : VacantPosts : CourtOrder : RegularJobs : EmploymentOpportunity : StateGovernment : JobAlert : उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को सभी विभागों में स्वीकृत रिक्त पदों का पूरा डेटा हलफनामे के जरिए पेश करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने नियमित भर्ती प्रक्रिया में देरी और संविदा/अस्थायी नियुक्तियों पर गंभीर चिंता जताई। इस आदेश के बाद माना जा रहा है कि आने वाले समय में वर्षों से सरकारी नौकरी का इंतजार कर रहे युवाओं के लिए रास्ता खुलेगा।
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि पूरे प्रदेश में युवा सरकारी नौकरी का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन कई लोग इस इंतजार में ओवर एज हो रहे हैं। इसके बावजूद सरकार नियमित भर्ती के बजाय आउटसोर्स और अस्थायी माध्यमों से काम चला रही है। जस्टिस राकेश थपलियाल ने इस प्रथा को शोषणकारी और तर्कहीन करार दिया और सवाल उठाया कि खाली पदों पर भर्ती क्यों नहीं हो रही है।
न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रत्येक विभाग में स्वीकृत और स्थायी रिक्तियां मौजूद हैं…लेकिन संबंधित अधिकारी नियमित भर्ती प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ा रहे हैं। इसके बजाय इन पदों को अनुबंध दैनिक वेतनभोगी और तदर्थ कर्मचारियों के माध्यम से भरा जा रहा है…जिसे गंभीर चिंता का विषय बताया गया।
कोर्ट ने मुख्य सचिव को निर्देश दिए कि वे सभी विभागों से स्वीकृत रिक्तियों का पूरा विवरण एकत्र कर हलफनामा दाखिल करें। इसके साथ यह भी स्पष्ट करें कि स्थायी और नियमित पदों के उपलब्ध होने के बावजूद भर्ती क्यों नहीं की जा रही है। कोर्ट ने यह भी पूछा कि श्रेणी-चार के पदों को डेड कैडर क्यों घोषित किया गया।
अगली सुनवाई 16 फरवरी को होगी। यदि सरकार डेटा पेश करती है और कोर्ट संतुष्ट नहीं होता…तो बड़े पैमाने पर भर्ती अभियान शुरू करने का आदेश दिया जा सकता है। इससे युवा वर्ग को सरकारी नौकरी पाने का अच्छा मौका मिल सकता है।






