
Uttarakhand Education News : Government Schools Uttarakhand : Principal Vacancy Uttarakhand ; Headmaster Vacancy : Dhansingh Rawat : School Education Uttarakhand : Teacher Recruitment Update : उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा सामने आया है। प्रदेश के सरकारी हाईस्कूलों में प्रधानाध्यापक और इंटरमीडिएट कॉलेजों में प्रधानाचार्य के अधिकांश पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। हालात यह हैं कि करीब 93 प्रतिशत पद अभी भी रिक्त हैं, जिससे स्कूलों के संचालन और प्रशासनिक व्यवस्था पर असर पड़ रहा है। Government Schools Uttarakhand में इस स्थिति को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि इन खाली पदों को भरने के लिए सरकार ने योजना तैयार की है। इसके तहत करीब 50 प्रतिशत पद सीमित विभागीय भर्ती के माध्यम से भरे जाने का प्रस्ताव रखा गया था। Principal Vacancy Uttarakhand को लेकर यह प्रस्ताव राज्य लोक सेवा आयोग को भी भेजा गया था…लेकिन बाद में इसे वापस लेना पड़ा।
दरअसल, इस फैसले का राजकीय शिक्षक संघ ने विरोध किया था। शिक्षकों का कहना था कि प्रधानाध्यापक और प्रधानाचार्य के सभी पद पदोन्नति के आधार पर भरे जाने चाहिए…क्योंकि ये पद प्रमोशन श्रेणी में आते हैं। Teacher Recruitment Update से जुड़े इस विवाद के बाद सरकार ने फिलहाल आयोग को भेजा गया प्रस्ताव वापस ले लिया।
शिक्षा मंत्री के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के एक सितंबर 2025 के आदेश के बाद यह प्रस्ताव वापस लिया गया है। अब सर्वोच्च न्यायालय का अंतिम फैसला आने के बाद ही आगे की भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाएगी। School Education Uttarakhand से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि अंतिम निर्णय के बाद खाली पदों को भरने की कार्रवाई तेज की जाएगी।
इधर प्रदेश के अशासकीय विद्यालयों से जुड़ा एक और मामला भी सामने आया है। जानकारी के मुताबिक राज्य के 133 अशासकीय स्कूलों में कार्यरत 413 तदर्थ प्रवक्ता और एलटी शिक्षक मौलिक नियुक्ति के लिए पात्र नहीं पाए गए हैं। Dhansingh Rawat ने कहा कि यह स्थिति कटऑफ तिथि के कारण बनी है।
विभागीय अधिकारियों ने कहा कि उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा अधिनियम 2006 की धारा 40 के तहत तदर्थ सेवाओं के विनियमितीकरण की व्यवस्था है। इसके लिए 30 जून 2010 को कटऑफ डेट तय की गई थी। जिन शिक्षकों की नियुक्ति इस तिथि के बाद हुई है…वे मौलिक नियुक्ति के लिए पात्र नहीं माने जाएंगे।
प्रदेश में बड़ी संख्या में खाली पड़े प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक के पदों के कारण स्कूलों के संचालन पर असर पड़ रहा है। ऐसे में अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी है….जिसके बाद ही इन पदों को भरने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।






