
NainitalTourism : NewYearTourism : HotelBusiness : TouristDecline : ParkingIssue : UttarakhandNews : सरोवर नगरी नैनीताल में थर्टी फर्स्ट के मौके पर पर्यटकों की उम्मीद के मुताबिक आमद नहीं होने से होटल, रेस्टोरेंट और पर्यटन से जुड़े कारोबार पर बुरा असर पड़ा है। शहर के कारोबारियों का आरोप है कि पर्यटक वाहनों को डायवर्ट करने और एंट्री प्वाइंट पर पुलिस की सख्ती के कारण बड़ी संख्या में सैलानी नैनीताल नहीं पहुंच सके।
कारोबारियों के अनुसार शहर और आसपास के क्षेत्रों खुर्पाताल, नयना देवी बर्ड रिजर्व, ज्योलीकोट, गेठिया, बल्दियाखान, जोखिया और मंगोली में होटलों की बुकिंग केवल 50 से 70 प्रतिशत तक ही रह पाई। शहर के कई छोटे, मध्यम और बड़े होटलों में 30 से 40 प्रतिशत कमरे खाली रहे, जबकि रेस्टोरेंटों में भी कारोबार सामान्य से काफी कम रहा।
नैनीताल की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार पर्यटन है। शहर और आसपास करीब एक हजार होटल, गेस्ट हाउस और होम स्टे, 700 से अधिक टैक्सियां, झील में नौकायन से जुड़े करीब 500 परिवार, दर्जनों आउटडोर फोटोग्राफर और सैकड़ों पंजीकृत-अपंजीकृत टूर गाइड अपनी आजीविका पर्यटन से चलाते हैं। इसके अलावा स्नोव्यू, हिमालय दर्शन, बारापत्थर, केव गार्डन और सड़क किनारे मैगी प्वाइंट जैसे छोटे कारोबार भी पूरी तरह पर्यटकों पर निर्भर हैं।
मां नयना देवी व्यापार मंडल के अध्यक्ष पुनीत टंडन का कहना है कि पार्किंग समस्या और ऊंचे पार्किंग शुल्क के कारण पहले ही नैनीताल की छवि खराब हो चुकी है। शहर के 70 प्रतिशत से अधिक होटलों में पार्किंग की सुविधा नहीं है…जबकि पार्किंग शुल्क 500 रुपये तक होना पर्यटकों को खटकता है।
वहीं होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष दिग्विजय बिष्ट का कहना है कि पुलिस की नकारात्मक व्यवस्था और एंट्री प्वाइंट पर सख्ती से पर्यटन कारोबार को नुकसान पहुंचा है। सोशल मीडिया पर नैनीताल को लेकर वायरल हो रही नकारात्मक रील्स ने भी स्थिति और बिगाड़ी।
हालांकि इस मामले पर एसपी नैनीताल डॉ. जगदीश चंद्रा ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि किसी भी पर्यटक को रोका या वापस नहीं भेजा गया। बिना बुकिंग वाले वाहनों को केवल पार्किंग उपलब्ध न होने की स्थिति में रोका गया और उन्हें शटल सेवा से भेजा गया। उन्होंने कहा कि पुलिस ने सिर्फ व्यवस्था बनाए रखने का काम किया है…पर्यटकों की कम आमद के अन्य कारण भी हो सकते हैं।






