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मानसिक बीमारी पर बनी ये फिल्म बदल देगी सोच, आखिर क्या है ‘प्रोजेक्ट रूपांतरण’?

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Project Roopantaran | Schizophrenia Awareness | Almora Short Film | Mental Health India | Independent Cinema : उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में बनी शॉर्ट फिल्म प्रोजेक्ट रूपांतरण अपने नाम के अनुसार बदलाव की एक अनोखी कहानी पेश करती है। यह फिल्म Project Roopantaran और Schizophrenia Awareness जैसे महत्वपूर्ण विषयों को जोड़ते हुए दर्शकों को एक नया दृष्टिकोण देती है।

फिल्म की शूटिंग अल्मोड़ा के विभिन्न खूबसूरत स्थानों पर की गई है…जिससे इसमें स्थानीय संस्कृति और वातावरण की झलक भी देखने को मिलती है। खास बात यह है कि फिल्म Mental Health India के गंभीर मुद्दे सिजोफ्रेनिया पर आधारित है…लेकिन इसे डरावने तरीके से नहीं बल्कि बेहद सहज और समझने योग्य ढंग से प्रस्तुत किया गया है।

Schizophrenia Awareness: क्या है खास

इस फिल्म में सिजोफ्रेनिया जैसे मानसिक विकार को दिखाया गया है, जिसमें व्यक्ति का वास्तविकता से संपर्क धीरे-धीरे टूटने लगता है। यह बीमारी सोचने, महसूस करने और व्यवहार करने के तरीके को गहराई से प्रभावित करती है।

फिल्म Almora Short Film के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश करती है कि दवाइयों के अलावा भी मानसिक स्वास्थ्य के अन्य उपचार और सहायक तरीके मौजूद हैं…जिन पर ध्यान देना जरूरी है।

स्थानीय कलाकारों ने निभाई अहम भूमिका

फिल्म में मुख्य रूप से चार कलाकारों के साथ स्कूल के बच्चों को भी शामिल किया गया है। सभी कलाकार अल्मोड़ा और हल्द्वानी क्षेत्र से जुड़े हुए हैं।

इसमें नीरज पंत, विपुल जोशी, रवि प्रसाद, हर्षित दुर्गापाल और महतगांव जूनियर हाईस्कूल के बच्चों व शिक्षकों ने अभिनय किया है। इससे फिल्म को एक वास्तविक और जमीनी रूप मिला है, जो Independent Cinema की ताकत को दर्शाता है।

तकनीकी टीम और सहयोग

फिल्म की सिनेमेटोग्राफी दीपांशु कुमार ने संभाली है…जबकि एडिटिंग का काम नरेंद्र धाकड़ ने किया है। फिल्म को विपुल जोशी ने लिखा और निर्देशित किया है। इसके अलावा त्रिभुवन गिरी महाराज, गौरव बंब और जितेंद्र गोस्वामी का भी फिल्म निर्माण में विशेष सहयोग रहा है।

बदलाव का संदेश

“प्रोजेक्ट रूपांतरण” सिर्फ एक फिल्म नहीं बल्कि समाज में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता फैलाने की एक कोशिश है। यह फिल्म बताती है कि सही समझ, सहयोग और वैकल्पिक उपचार से मानसिक बीमारियों से जूझ रहे लोगों की जिंदगी में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।

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