
Uttarakhand School | Rural Education | Migration Impact | Government School Revival : बागेश्वर से एक सकारात्मक खबर सामने आई है….जहां कपकोट तहसील के गोलना गांव में एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय को बंद होने से बचा लिया गया। उत्तराखंड में पिछले पांच वर्षों में शून्य छात्र संख्या के कारण 800 से अधिक प्राथमिक विद्यालय बंद हो चुके हैं….जिनकी बड़ी वजह ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन और घटती छात्र संख्या रही है।
गोलना का यह विद्यालय भी इसी संकट से गुजर रहा था। पिछले चार वर्षों से स्कूल सिर्फ एक छात्रा के सहारे चल रहा था। इस वर्ष छात्रा के पांचवीं उत्तीर्ण करने के बाद विद्यालय पूरी तरह खाली हो गया और इसके बंद होने का खतरा बढ़ गया।
लेकिन गांव के लोगों ने हार नहीं मानी। ग्राम प्रधान ज्योति शाही, सामाजिक कार्यकर्ता कमल शाही और अभिभावकों ने मिलकर बच्चों का नामांकन इसी स्कूल में कराने का फैसला लिया।
इस सामूहिक प्रयास का असर अब साफ दिख रहा है। जहां पहले स्कूल में सन्नाटा था वहीं अब 10 बच्चों का नामांकन हो चुका है और 5 अन्य बच्चों के दाखिले की प्रक्रिया जारी है।
अभिभावक खष्टी शाही ने कहा कि सरकारी स्कूलों को बचाना हम सभी की जिम्मेदारी है। वहीं प्रधानाध्यापिका मुन्नी गड़िया ने इसे समाज की जागरूकता और शिक्षा के प्रति सकारात्मक सोच का प्रतीक बताया।
गोलना गांव की यह पहल न सिर्फ एक स्कूल के पुनर्जीवन की कहानी है…बल्कि यह दिखाती है कि सामूहिक प्रयास से किसी भी चुनौती का समाधान संभव है।






