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कोविड के चलते छोड़ा शहर पर गांव जाकर कर दिया बड़ा काम, अल्मोड़ा की दंपत्ति को मिल गई पहचान

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Village Success Story : Almora : Self Employment : Beekeeping : Honey Production : Atmanirbhar Village : Uttarakhand : अल्मोड़ा जिले के कनालबुंगा गांव का एक दंपति आज पहाड़ों में स्वरोजगार की मिसाल बन चुका है। कोविड काल के दौरान जब शहरों में हालात खराब थे….तब इस दंपति ने दिल्ली छोड़कर अपने गांव लौटने का फैसला किया। गांव पहुंचकर उन्होंने नया रास्ता चुना और मधुमक्खी पालन को अपना रोजगार बनाया।

शुरुआत में नारायण फर्त्याल ओर उनकी पत्नी निर्मला फर्त्याल के लिए यह काम आसान नहीं था। न उन्हें ज्यादा अनुभव था और न ही बाजार की पूरी जानकारी। कई बार नुकसान भी हुआ और मौसम की वजह से परेशानी झेलनी पड़ी…लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी। लगातार सीखते और मेहनत करते हुए आज वे मधुमक्खी पालन में पूरी तरह सफल हो चुके हैं।

एक मधुमक्खी बॉक्स तैयार होने में करीब तीन से चार महीने का समय लगता है और इसकी कीमत लगभग 6200 रुपये होती है। साल 2025 में उनके पास 365 बॉक्स थे और अब साल 2026 के लिए उन्होंने 400 बॉक्स का लक्ष्य रखा है। उनके द्वारा तैयार किया गया शुद्ध पहाड़ी शहद बाजार में 1100 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रहा है…जिसकी अच्छी मांग है।

मधुमक्खी पालन से दंपति को अच्छी आमदनी हो रही है और वे आत्मनिर्भर बन चुके हैं। उनकी मेहनत को प्रशासन ने भी सराहा है। उन्हें जिलाधिकारी, राज्यपाल और मुख्यमंत्री द्वारा स्वरोजगार के लिए सम्मानित किया जा चुका है। साथ ही वे स्टार्टअप इंडिया उत्तराखंड से भी जुड़े रहे हैं।

आज कनालबुंगा गांव का यह दंपति पहाड़ों के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया है। उनकी कहानी यह साबित करती है कि मेहनत और सही सोच के साथ गांव में रहकर भी सम्मानजनक रोजगार किया जा सकता है।

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