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भूकंप जोन 4 में उत्तराखंड का हाईड्रो प्रोजेक्ट टनल रिसाव के कारण बंद, काम 4–6 महीने रुकेगा

UERC
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UERC ; Hydropower : ManneriBhaliII : HRTRisk : HydropowerSafety : UJVN : Dehradun : EnergySecurity : TunnelRepair : उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (UERC) ने मनेरी भाली-द्वितीय जलविद्युत परियोजना (304 मेगावाट) की हेड रेस टनल (HRT) में गैमरी गाड़ क्षेत्र से हो रहे गंभीर पानी के रिसाव को अत्यंत संवेदनशील मानते हुए 12.27 करोड़ रुपये के पुनर्वास कार्यों की मंजूरी दे दी है।

आयोग ने कहा कि गैमरी गाड़ में टनल के ऊपर की मिट्टी की मोटाई केवल 20-22 मीटर है और यह क्षेत्र सक्रिय श्रीनगर थ्रस्ट के बेहद पास है। भू-भौगोलिक और भूकंपीय दृष्टि से यह जगह अत्यधिक संवेदनशील मानी जाती है। 2021 में यहाँ रिसाव 229 लीटर प्रति सेकेंड था….जो 2024 तक बढ़कर 1602 लीटर प्रति सेकेंड तक पहुंच गया है। आयोग ने चेताया कि समय रहते मरम्मत न होने पर न केवल टनल कमजोर होगी बल्कि परियोजना की सुरक्षित बिजली उत्पादन क्षमता और राज्य के ऊर्जा तंत्र पर गंभीर खतरा हो सकता है।

यूजेवीएन लिमिटेड ने बताया कि परियोजना भागीरथी नदी पर आधारित 304 मेगावाट की रन-ऑफ-द-रिवर योजना है…जो प्रतिवर्ष लगभग 1566 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन करती है। जल जोशियाड़ा बैराज से 16 किलोमीटर लंबी HRT के माध्यम से धरासू पावर हाउस तक पहुँचता है, जहां चार इकाइयों में 76-76 मेगावाट की क्षमता से बिजली बनाई जाती है।

विशेषज्ञों ने आयोग को कहा कि स्थायी मरम्मत में चार से छह माह तक परियोजना बंद रह सकती है…जिससे लगभग 50 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व नुकसान हो सकता है। आयोग ने यूजेवीएन को सशर्त मंजूरी देते हुए निर्देश दिए कि सभी कार्य न्यूनतम लागत, तय गुणवत्ता और विशेषज्ञों की निगरानी में किए जाएँ।

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