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नोटबंदी का फैसला दिखा सकता है स्वर्णिम असर

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नई दिल्ली। देश में 500-1000 के नोट बंद होने से सरकारी का खजाना भर रहा है। यही नही मौजूदा सरकार के कठोर फैसला का लाभ देश को मिल सकता है। इस प्रयास भारत दुनिया के अमीर देशों की लिस्ट में तीसरे स्थान पर पहुंच सकता है। भारत ने कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों को पछाड़ दिया है।  इस सूची में भारत पांचवें स्थान पर काबिज है। सामने आ रहे है आंकड़ों के अनुसार अभी तक बैंकों के पास चार लाख करोड़ रुपये जमा हो गए हैं। नोटबंदी के बाद लोग कैश जमा कराने बैंकों की तरफ भाग रहे हैं। बैंकों के पास इससे इतना कैश जमा हो रहा है कि उन्होंने डिपॉजिट रेट्स में कटौती शुरू कर दी है। इसके बाद लोन सस्ते होंगे।इससे रिजर्व बैंक की लंबे समय से चली आ रही यह शिकायत भी दूर हो जाएगी कि बैंक उसके रेट कट का पूरा फायदा कस्टमर्स को नहीं दे रहे हैं।ता दें कि दिल्ली और दूसरी कई जगहों पर बैंकों के पास बुधवार को कैश खत्म हो गया, लेकिन कुछ शहरों में बैंक की ब्रांचों के बाहर की लाइन छोटी होने की खबरें भी आईं। बैंको के बाहर लग रही लंबी लाइनों से परेशान लोगों को धीरे-धीरे निजात मिल रही है। भारतीय स्‍टेट बैंक (एसबीआई) ने एक साल से 455 दिनों के डिपॉजिट रेट को घटाकर 6.90 फीसदी कर दिया है। उसने इसमें 0.15 फीसदी की कटौती की है। वहीं, बैंक ने 211 दिन से एक साल के जमा के लिए डिपॉजिट रेट को पहले के 7 फीसदी पर बनाए रखा है।यह उन लोगों के लिए अच्छी खबर नहीं है जो बैंकों में पैसे जमा करा रहे हैं, लेकिन इससे कुछ ही हफ्तों में लोन सस्ते होने लगेंगे। इससे अर्थव्यवस्था को उछाल मिलेगा, जिससे जीडीपी बढ़ेगी। भारतीय स्टेट बैंक की चेयरमैन अरुंधति भट्टाचार्य ने कहा कि सभी रेट्स कम होंगे। बैंकों के पास काफी धन आ रहा है, लेकिन लोन की मांग अभी कम है। इसलिए कुछ समय बाद लोन की दरें कम होंगी। ह उन लोगों के लिए अच्छी खबर नहीं है जो बैंकों में पैसे जमा करा रहे हैं, लेकिन इससे कुछ ही हफ्तों में लोन सस्ते होने लगेंगे। इससे अर्थव्यवस्था को उछाल मिलेगा, जिससे जीडीपी बढ़ेगी। भारतीय स्टेट बैंक की चेयरमैन अरुंधति भट्टाचार्य ने कहा कि सभी रेट्स कम होंगे। बैंकों के पास काफी धन आ रहा है, लेकिन लोन की मांग अभी कम है। इसलिए कुछ समय बाद लोन की दरें कम होंगी।एसबीआई और उसके सहयोगी बैंकों को बुधवार तक 1 लाख करोड़ रुपये का डिपॉजिट मिल चुका था। देश के बैंकिंग मार्केट के 25 फीसदी हिस्से पर स्टेट बैंक और उसके सहयोगी बैंकों का कब्जा है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री ने 8 नवंबर की आधी रात के बाद 500 और 1,000 रुपये के नोट का इस्तेमाल कुछ जरूरी सेवाओं को छोड़कर बाकी के लिए बंद करवा दिया था। सरकार ने कालाधन, नकली नोटों और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए यह कदम उठाया है।

 

न्यूज सोर्स-hindikhabar

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