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नैनीताल: दो पौधों के नाम लैला और मजनु, जल संरक्षण के लिए खास है जोड़ा


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हल्द्वानी: विकास सिंह यादव: लैला और मजनु के किस्सों को बहुत सुना और पढ़ा जाता है। दोनों की प्रेम कथा भी काफी चर्चित है। जंगल में भी इसी रूप में दो पौधे लैला और मजनु के नाम से जाने जाते हैं। जिन्हें वन अनुसंधान केंद्र की गाजा रेंज में संरक्षित भी किया जा रहा है। यह पौधे जल संरक्षण के कार्य में प्रकृति के लिए मददगार भी माने जाते हैं। वन अनुसंधान केंद्र के रेंजर मदन सिंह बिष्ट ने बताया कि मजनु (सैलिक्स बेबिलोनिका) और लैला (सैलिक्स एल्बा) नाम के पौधों को ज्योलीकोट स्थित नर्सरी में सं‌रक्षित किया जा रहा है।

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ये पौधे जल संरक्षण में महत्वूर्ण माने जाते हैं, साथ ही इसका औद्योगिक महत्व क्रिकेट बैट बनाने में भी किया जाता है। ये अधिकांश नमी वाले स्थानों पर पाए जाते हैं। पर्यावरण और जल संरक्षण में दोनों को महत्वपूर्ण माना गया है। नैनीताल जिले में यह पौधे नैनीझील के आस-पास भी पाए जाते हैं। बताया कि यह पौधे तालाब, रुका हुआ पानी, नदियों आदि जल स्रोते के नजदीक अधिक पाए जाते हैं। वहीं हिमाचल प्रदेश के शिमला में भी पौधे के संरक्षण को लेकर कार्य किया जा रहा है। बताया कि इन्हें वन क्षेत्रों में जल संरक्षण के लिए लगाया जाएगा। ये जल स्रोतों को रिचार्ज करने में भी सहायक माने जाते हैं।

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