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उत्तराखंड में बना चमड़ा उत्पाद विदेशों में बनाएगा पहचान, डिजाइनिंग कौशल को निखारना होगा

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देहरादूनः राज्य में चमड़ा उत्पाद आधारित उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए उद्योग विभाग, उत्तराखंड सरकार ने सेन्ट्रल लैदर रिसर्च इन्स्टीट्यूट चेन्नई (CSR-CLRI) के सहयोग से देहरादून में चमड़ा आधारित उत्पादों के साथ-साथ चमड़े से जुड़े उत्पादों के निर्माताओं के लिए “गुणवत्ता प्रबंधन कार्यशाला चमड़ा उत्पाद पर एक इंटरैक्टिव कार्यशाला का आयोजन किया।

इस कार्यशाला का उद्देश्य सभी चमड़ा उत्पाद निर्माताओं को एक छत के नीचे लाना और उन्हें उत्तराखंड के चमड़ा उद्योगों और इसके अवसरों की एक डालक प्रदान करना था। कार्यशाला के दौरान गुणवत्ता की दिशा में प्रोसेस ऑडिट, गुणवत्ता प्रबंधन, साख्यिकीय प्रक्रिया नियंत्रण (एसपीसी) गुणवत्ता में कैसे योगदान देता है, गुणवत्ता निरीक्षण की हैंडलिंग प्रक्रिया जैसे विषयों पर चर्चा की गई। राजेश सी.एम. वैज्ञानिक, सीएसआईआर- केंद्रीय चमड़ा अनुसंधान संस्थान ने प्रतिभागियों को गुणवत्ता निरीक्षण के लिए अपनाई जा सकने वाली विधियों, गुणवत्ता जांच अंशांकन कैसे किया जा सकता है, गुणवत्ता वाले उत्पादों के लिए सर्वोत्तम अभ्यास क्या हैं, कन्वेयर में स्टेज इस्पेक्टरों की भूमिका क्या है के बारे में जानकारी दी।

उत्तराखंड में चमड़ा उद्योग ज्यादातर निर्यातोन्मुख है और गुणवत्ता के मामले में अंतरराष्ट्रीय मानक को पूरा करना बहुत आवश्यक है। सुरेश कुमार वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक, सीएसआईआर- केंद्रीय चमड़ा अनुसंधान संस्थान, चेन्नई ने कहा कि चमड़ा उद्योग में गुणवत्ता का मतलब है कि कुछ भी सुधार किया जा सकता है। एक उत्पाद को अच्छी गुणवत्ता का कहा जाता है यदि यह प्रदर्शन ग्रेड स्थायित्व उपस्थिति और इच्छित उपयोग / उद्देश्य आदि के मामले में ग्राहकों की आवश्यकताओं को पूरा करता है। आर्थिक गतिविधियों के सभी क्षेत्रों में अनुकूल प्रयासों से समाज के लिए गुणवत्तापूर्ण उत्पादों का विशेष महत्व है, लेकिन गुणवत्ता में निरंतर सुधार की आवश्यकता है।”

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एस सी नौटियाल, निदेशक, उद्योग विभाग, उत्तराखंड सरकार ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि चमड़ा उत्पाद आधारित उद्योग देश के शीर्ष 10 निर्यातान्मुखी उद्योगों में से एक है और इस क्षेत्र की कई कम्पनियां की उत्तराखण्ड में चमड़ा उत्पाद आधारित फुटवियर एवं अन्य उत्पादों की विनिर्माणक इकाइयों हैं। यहां मौजूद कंपनियां उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों का उत्पादन करती हैं, लेकिन उनमें डिजाइनिंग कौशल की कमी है। यह वर्कशॉप कंपनियों को डिजाइनिंग और गुणवत्ता कौशल में सुधार करने और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में मदद करने के लिए सहायक सिद्ध होगी। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार विभिन्न उद्योगों को तकनीकी सहायता, प्रशिक्षण एवं अनुसंधान के क्षेत्र में सहायता हेतु देश के शीर्ष तकनीकी संस्थानों के माध्यम से सुविधा उपलब्ध कराने के लिए तत्पर है।

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इंटरैक्टिव सत्र के दौरान, उद्योग के प्रतिनिधि यह जानने के लिए उत्सुक थे कि क्या गुणवत्ता जांच के लिए कोई निश्चित तरीके हैं और वे कच्चे नाल और सहायक उत्पादों के स्रोत कहा से प्राप्त कर सकते हैं। इस संदर्भ में सीएलआरआई के प्रमुख वैज्ञानिक श्री सुरेश कुमार द्वारा विस्तृत जानकारी उपलब्ध करायी गयी।

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कार्यशाला में पंकज गुप्ता, अध्यक्ष आईएयू राकेश भाटिया, आईआईए हिमेश कपूर. एस.ई. डब्ल्यू.ए. उत्तराखण्ड, श्री शिखर सक्सेना, संयुक्त निदेशक, उद्योग विभाग, सेन्ट्रल लेदर रिसर्च इन्स्टीट्यूट, चेन्नई, औद्योगिक संघों के प्रतिनिधि विभाग के अधिकारी, चमड़ा आधारित उत्पादक कम्पनियों के क्वालिटी मैनेजर एवं निर्माता उपस्थित रहे।

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