
देहरादून: अमेरिका की तथाकथित धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) की हालिया सुनवाई में भारत के तीन प्रमुख मुख्यमंत्रियों—उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा—को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। सुनवाई के दौरान कथित वामपंथी-लिबरल एक्टिविस्ट रक़ीब अहमद नाइक ने इन नेताओं पर प्रतिबंध लगाने की मांग की।
सुनवाई में हिंदुत्व विचारधारा, राष्ट्रवादी संगठनों और भारत सरकार की नीतियों को लेकर भी तीखी टिप्पणियां की गईं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS), बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद जैसे संगठनों का नाम लेते हुए उन्हें भी निशाने पर लिया गया।
राजनीतिक और सामाजिक हलकों में इस घटनाक्रम को लेकर बहस तेज हो गई है। समर्थकों का कहना है कि जिन नेताओं ने अपने-अपने राज्यों में धर्मांतरण, अवैध कब्जों, कट्टरपंथ, घुसपैठ और समान नागरिक संहिता जैसे मुद्दों पर सख्त रुख अपनाया, वही अब विदेशी मंचों पर आलोचना का सामना कर रहे हैं।
उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में उठाए गए कदम, अवैध अतिक्रमण और धर्मांतरण के खिलाफ कार्रवाई चर्चा में रही है। वहीं उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार की माफिया और अपराधियों पर कार्रवाई तथा असम में हिमंता बिस्वा सरमा द्वारा घुसपैठ और जनसंख्या असंतुलन जैसे मुद्दों को लगातार उठाया जाता रहा है।
इस पूरे मामले को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक मंचों पर प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। एक वर्ग इसे भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान की आवाज़ को दबाने की कोशिश बता रहा है, जबकि आलोचक इसे अल्पसंख्यकों और मानवाधिकारों से जुड़े मुद्दों से जोड़कर देख रहे हैं।
फिलहाल USCIRF की सुनवाई और उसमें दिए गए बयानों को लेकर देश में राजनीतिक बहस तेज हो गई है।






