Editorial

संपादकीय: केजरीवाल सरकार की नैया पार लगा सकती है महिलाशक्ति


नई दिल्ली: हेमराज सिंह चौहान: केजरीवाल की महिलाओं के लिए बसों में मुफ्त सफर की योजना पूरे देश में लागू होनी चाहिए। मैं अब डीटीसी की बसों में सफर बहुत कम करता हूँ। वजह एक तो नोएडा में लंबे समय तक जॉब करना है, जहां ट्रांसपोर्ट के और साधन भी हैं। ऐसे में लंबे समय आज डीटीसी बस में सफ़र करना हुआ। मैंने लगभग 15 किलोमीटर का डीटीसी की एसी बस का सफर इस दौरान किया। इस रूट में शहरी एरिया के साथ थोड़ा पिछड़ा हुआ एरिया ये रहें झुग्गी-बस्ती वाला इलाका भी पड़ता है। अपनी इस यात्रा के दौरान मैंने महसूस किया कि डीटीसी में महिलाओं का तादात काफी ज्यादा बढ़ी है। हर स्टैंड पर मै़ने महिलाओं को उतरते चढ़ते देखा। इस पर महिलाओं का हर तबका दिखा, चाहे वो स्टूडेंट्स हो या फिर कामकाजी महिलाएं और बुजुर्ग महिलाएं. इसके अलावा उनकी सुरक्षा मे़ एक मार्शल भी दिखा।

मैंने महिलाओं में एक सुकुन सा देखा कि जिससे लगता हो वो कह रही हों कि चलो कोई तो महिलाओं के लिए सोचता है। केजरीवाल को इस योजना का ज़बरदस्त फ़ायदा मिलेगा, ऐसा मेरा निजी आकलन है। दिल्ली के विधानसभा चुनाव में ये अरविंद केजरीवाल और उनकी सरकार के लिए ये गेम चेंजर जैसी योजना हो सकती है, क्योंकि मुझे भरोसा है कि महिलाओं को इस योजना से बचत और सुरक्षा का भाव पैदा हो रहा है। दिल्ली जैसे शहर में जहां महिलाओं के साथ अपराध की खबरों के बीच उनके लिए ये योजना भरोसा देती होगी कि हमारी सुरक्षा की चिंता सरकार को है तो सही। मुझे लगता है कि केजरीवाल सरकार की इस योजना को हर राज्यों में लागू करना चाहिए। ये योजना महिला सशक्तीकरण की दशा में एक क्रांतिकारी कदम है।

सरकारी ट्रासंपोर्ट में सफर करने से जहां एक तरफ महिलाओं के पैसे की बचत होगी वहीं दूसरी तरफ़ बसों में उनकी सुरक्षा में मार्शल रखने से छेड़छाड़ जैसे अपराध में कमी जाएगी।अभी भी कई छात्राएं छेड़छाड़ जैसे अपराधों की वजह से अपनी पढ़ाई जारी नहीं रख पाती, वहीं दूसरी तरफ की महिलाओं को उनके घर वाले अपराध के डर से नौकरी नहीं करने देते। रही बात सब्सिडी की तो मेरे ख्याल से बेटी बढ़ाओ बेटी बचाओ जैसे नारे देने के साथ उनकी सामाजिक सुरक्षा में इसे देने में किसी सरकार को तकलीफ नहीं होनी चाहिए। महिलाओं को बराबरी का हक दिलाने में ये योजना बहुत बड़ी भूमिका निभा सकती है, अगर इस पर गंभीरता से देश की केंद्र सरकार और राज्य सरकारें इस पर गौर करें तो ये पूरे देश में संभव हो सकता है।

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