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जंतर-मंतर के मंच पर उत्तराखंड पुलिस की वर्दी में पहुंचा निलंबित सिपाही, वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने बताई पूरी सच्चाई

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Uttarakhand Police | Sher Singh | Jantar Mantar : दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के दौरान उत्तराखंड पुलिस की वर्दी पहने एक व्यक्ति का मंच पर पहुंचना चर्चा का विषय बन गया। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में वह खुद को पुलिसकर्मी बताते हुए छात्रों के समर्थन में बोलता नजर आया। उसने मंच से उत्तराखंड की भर्ती परीक्षाओं को लेकर भी विवादित टिप्पणी की और वर्दी से अपना बैज उतारते हुए कथित तौर पर पुलिस सेवा छोड़ने की घोषणा की। वीडियो सामने आने के बाद उत्तराखंड पुलिस ने पूरे मामले पर आधिकारिक जानकारी जारी की है।

उत्तराखंड पुलिस के अनुसार वीडियो में दिखाई दे रहा व्यक्ति पिथौरागढ़ में तैनात निलंबित कांस्टेबल शेर सिंह है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि वह लंबे समय से सक्रिय सेवा में नहीं है और पहले से ही विभागीय कार्रवाई का सामना कर रहा है।

कुमाऊं रेंज की आईजी निवेदिता कुकरेती ने कहा कि शेर सिंह 28 जून 2026 से बिना अनुमति ड्यूटी से अनुपस्थित था। उसे पिथौरागढ़ पुलिस की ओर से नोटिस जारी किया गया, लेकिन जवाब नहीं मिलने पर 20 जुलाई 2026 को उसे निलंबित कर दिया गया। पुलिस का कहना है कि वर्तमान में वह विभाग का सक्रिय कर्मचारी नहीं है।

पुलिस के मुताबिक शेर सिंह का आपराधिक रिकॉर्ड भी रहा है। उसके खिलाफ पहले से गंभीर मामलों में कार्रवाई चल रही है। विभाग का दावा है कि वह हरिद्वार-रुड़की क्षेत्र में सक्रिय एक संगठित गिरोह से जुड़े मामले में आरोपी रह चुका है। इस मामले में उसके खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक साजिश और अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था।

पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान सामने आया था कि शेर सिंह पर कुछ अन्य आरोपियों के साथ मिलकर लोगों को डराने-धमकाने, विवादित जमीनों पर अवैध कब्जे और फर्जी दस्तावेजों के जरिए जमीन के सौदों में सहयोग करने के आरोप लगे थे। इस मामले में उसका नाम कुख्यात अपराधी प्रवीण वाल्मीकि से जुड़े गिरोह के साथ भी सामने आया था।

जांच एजेंसियों के अनुसार सितंबर 2025 में पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद शेर सिंह को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। बाद में उसे हाईकोर्ट से जमानत मिली…लेकिन गिरफ्तारी के बाद विभाग ने उसे तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था। पुलिस का कहना है कि उसके खिलाफ सेवा से बर्खास्तगी की विभागीय प्रक्रिया भी चल रही है।

उत्तराखंड पुलिस ने यह भी कहा कि जंतर-मंतर पर दिए गए उसके बयान व्यक्तिगत हैं और उनका विभाग से कोई संबंध नहीं है। पुलिस के अनुसार वीडियो में की गई टिप्पणियां भ्रामक और उकसाने वाली हैं। मामले की जांच की जा रही है और विभागीय नियमों के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो या किसी भी दावे पर विश्वास करने से पहले आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें। विभाग का कहना है कि पूरे मामले की निगरानी की जा रही है और आवश्यक कानूनी व विभागीय कार्रवाई नियमानुसार जारी रहेगी।

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