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कारगिल का वो शेर जिसने घायल होने के बाद भी 6 दुश्मनों को किया ढेर, जानिए हल्द्वानी के वीर की गाथा

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KargilWar | IndianArmy | HaldwaniHero | Lance Naik Kailash Chandra Bhatt : कारगिल युद्ध के वीर सैनिकों की बहादुरी आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्हीं वीरों में हल्द्वानी के लांस नायक कैलाश चंद्र भट्ट का नाम भी गर्व से लिया जाता है। वर्ष 1999 में ऑपरेशन विजय के दौरान उन्होंने दुश्मनों का डटकर सामना करते हुए ऐसा साहस दिखाया…जिसे आज भी सम्मान के साथ याद किया जाता है।

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मच्छल सेक्टर में दिखाई अदम्य वीरता

6 जून 1999 को मच्छल सेक्टर में भारतीय सेना दुश्मनों के खिलाफ अभियान चला रही थी। दुश्मन ऊंची पहाड़ियों पर छिपे हुए थे, जबकि भारतीय जवान कठिन परिस्थितियों में आगे बढ़ रहे थे। इसी दौरान आतंकियों ने अचानक एके-47 से ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी।

फायरिंग के बीच लांस नायक कैलाश चंद्र भट्ट के कंधे में लगातार चार गोलियां लगीं। एक गोली आर-पार निकल गई…जबकि तीन गोलियां शरीर में धंस गईं। गंभीर रूप से घायल होने और लगातार खून बहने के बावजूद उन्होंने मोर्चा छोड़ने से इनकार कर दिया। वे अपने साथियों के साथ डटे रहे और दुश्मनों पर जवाबी हमला जारी रखा।

घायल होने के बाद भी नहीं छोड़ा मोर्चा

कैलाश चंद्र भट्ट ने अद्भुत साहस का परिचय देते हुए छह से अधिक दुश्मनों को मार गिराया। जब तक पूरा क्षेत्र सुरक्षित नहीं हो गया…तब तक उन्होंने पीछे हटने के बारे में नहीं सोचा। अभियान पूरा होने के बाद उन्हें एयरलिफ्ट कर अस्पताल पहुंचाया गया…जहां उनका इलाज हुआ।

आज भी देश सेवा का वही जज्बा

कारगिल युद्ध के निशान आज भी उनके शरीर पर मौजूद हैं…लेकिन अपने शहीद साथियों की यादें उन्हें सबसे ज्यादा भावुक करती हैं। वर्तमान में जिला सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास कार्यालय, हल्द्वानी में सेवाएं दे रहे कैलाश चंद्र भट्ट का कहना है कि यदि आज भी मातृभूमि की रक्षा का अवसर मिले तो वह उसी जोश और समर्पण के साथ देश के लिए हर चुनौती का सामना करने को तैयार हैं।

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