Pithoragarh News

उत्तराखंड: बेरीनाग-चौकोड़ी की जमीन पर बड़ा प्रशासनिक फैसला, 25 हजार परिवारों को मालिकाना हक की उम्मीद

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Land Rights | Berinag News | Pithoragarh : पिथौरागढ़ के बेरीनाग और चौकोड़ी क्षेत्र में चाय बागान की जमीन को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद में प्रशासनिक कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों में उम्मीद बढ़ी है। प्रशासन ने नियमों के विपरीत इस्तेमाल या हस्तांतरण की गई जमीन की जांच कर उसे सीलिंग कानून के तहत राज्य सरकार में निहित करने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

इस फैसले के बाद क्षेत्र के करीब 25 हजार परिवारों को अपनी जमीन पर स्थायी मालिकाना हक मिलने की उम्मीद जगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जमीन का मालिकाना अधिकार नहीं होने के कारण उन्हें सरकारी योजनाओं और बैंक ऋण जैसी सुविधाओं का लाभ लेने में परेशानी होती रही है।

चाय बागान के लिए दी गई थी जमीन

अपर जिलाधिकारी योगेंद्र सिंह के अनुसार, बेरीनाग और चौकोड़ी क्षेत्र में कुछ जमीन चाय बागान को बढ़ावा देने और रोजगार के अवसर पैदा करने के उद्देश्य से आवंटित की गई थी। राजस्व अभिलेखों में यह भूमि चाय बागान के रूप में दर्ज है।

नियमों के मुताबिक राज्य सरकार की पूर्व अनुमति के बिना इस जमीन का क्रय-विक्रय नहीं किया जा सकता। नियमों के उल्लंघन की शिकायतों के बाद वर्ष 2006 में उपजिलाधिकारी और 2007 में जिलाधिकारी स्तर से जमीन की खरीद-बिक्री और रजिस्ट्रियों पर रोक लगाई गई थी।

इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए मामला नैनीताल हाईकोर्ट भी पहुंचा था। हालांकि संबंधित पक्ष को वहां से राहत नहीं मिली।

अब जमीन की हो रही जांच

प्रशासन के अनुसार ऐसी जमीन का परीक्षण किया जा रहा है…जिसका इस्तेमाल निर्धारित उद्देश्य के अलावा किसी अन्य काम में किया गया है या नियमों के खिलाफ उसका हस्तांतरण हुआ है।

जांच पूरी होने के बाद नियमों के तहत ऐसी भूमि को राज्य सरकार में निहित करने की कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए उपजिलाधिकारी बेरीनाग को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।

प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई का उद्देश्य सरकारी जमीन का संरक्षण करना, अवैध खरीद-बिक्री और अतिक्रमण पर रोक लगाना तथा स्टांप चोरी जैसे मामलों पर प्रभावी नियंत्रण करना है।

बेरीनाग और चौकोड़ी में कितनी जमीन?

राजस्व अभिलेखों के अनुसार बेरीनाग क्षेत्र में करीब 266 हेक्टेयर और चौकोड़ी में करीब 843 हेक्टेयर जमीन चाय बागान से जुड़ी बताई जाती है। क्षेत्र में करीब 25 हजार लोग निवास करते हैं।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि मालिकाना हक नहीं होने के कारण जमीन और मकान के आधार पर बैंक से ऋण लेने तथा कई सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने में दिक्कत होती है।

मालिकाना हक मिलने से विकास की उम्मीद

बेरीनाग भूमि संघर्ष समिति और स्थानीय लोगों की ओर से लंबे समय से जमीन पर मालिकाना हक की मांग की जाती रही है। अब प्रशासनिक कार्रवाई के बाद लोगों को उम्मीद है कि सरकार जनहित में कोई स्थायी समाधान निकाल सकती है।

स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि उन्हें कानूनी मालिकाना हक मिलता है तो क्षेत्र में व्यापार, निवेश और विकास को गति मिल सकती है। इससे लोगों को अपनी जमीन और घर पर कानूनी अधिकार भी मिल सकेगा।

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