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उत्तराखंड: छोटी उम्र में बड़ा कारनामा, पिता से प्रेरित होकर छात्र ने बनाई ऐसी कुर्सी जिसे मिला पेटेंट

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Pantnagar | Patent | Student Innovation : पंतनगर कैंपस स्कूल के कक्षा छह के छात्र व्योम केसरवानी ने अपनी सोच और तकनीकी समझ से खास उपलब्धि हासिल की है। व्योम ने बाएं हाथ से लिखने वाले विद्यार्थियों की परेशानी को ध्यान में रखते हुए एक ऐसी कुर्सी का डिजाइन तैयार किया है….जिसे जरूरत के अनुसार दाएं या बाएं हाथ से लिखने वाले छात्रों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

इस डिजाइन को भारत सरकार से पेटेंट भी मिल चुका है। कम उम्र में मिली इस उपलब्धि से स्कूल और विश्वविद्यालय परिवार में खुशी का माहौल है।

पढ़ाई के दौरान आया विचार

व्योम के पिता डॉ. अमित केसरवानी भी बाएं हाथ से लिखते हैं। उनके नाम पहले से तीन पेटेंट दर्ज हैं। पिता के काम को देखकर व्योम के मन में करीब एक साल पहले इस तरह की कुर्सी बनाने का विचार आया।

व्योम ने बताया कि उन्होंने करीब पांच-छह महीने पहले इस आइडिया पर गंभीरता से काम शुरू किया। इसके बाद कुर्सी के डिजाइन को तैयार किया गया।

कुछ ही समय में बदली जा सकती है कुर्सी

व्योम की बनाई कुर्सी को कुछ ही समय में दाएं या बाएं हाथ से लिखने वाले विद्यार्थियों के अनुसार बदला जा सकता है। आमतौर पर स्कूलों में इस्तेमाल होने वाली राइटिंग चेयर दाएं हाथ से लिखने वाले छात्रों को ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं।

इस कारण बाएं हाथ से लिखने वाले बच्चों को बैठने और लिखने में परेशानी होती है। नई डिजाइन वाली कुर्सी इसी समस्या को दूर करने की कोशिश है।

पिता ने की पेटेंट प्रक्रिया में मदद

व्योम के पिता डॉ. अमित केसरवानी ने डिजाइन को अंतिम रूप देने और पेटेंट की प्रक्रिया में उनका मार्गदर्शन किया। अब इस कुर्सी का प्रोटोटाइप तैयार कर इसे बड़े स्तर पर उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है।

इसके लिए स्कूल और जिला प्रशासन से सहयोग की उम्मीद जताई गई है।

स्वतंत्रता दिवस समारोह में हुआ सम्मान

व्योम की उपलब्धि के लिए स्वतंत्रता दिवस के मुख्य समारोह में उन्हें सम्मानित किया गया। विश्वविद्यालय के कुलसचिव, कैंपस स्कूल समिति के अध्यक्ष, प्रधानाचार्य और अन्य अतिथियों ने छात्र को शुभकामनाएं देते हुए उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

कम उम्र में व्योम की इस पहल को स्कूल और विश्वविद्यालय परिवार ने सराहा है। यह उपलब्धि दूसरे विद्यार्थियों को भी नए प्रयोग और नवाचार के लिए प्रेरित कर सकती है।

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