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उत्तराखंड में SIR के चौंकाने वाले आंकड़े, एक व्यक्ति ने दर्ज कराईं 5,906 आपत्तियां

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Uttarakhand SIR | Voter List | Dehradun News : उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के दौरान कई चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। प्रदेश में कुल 59,604 वास्तविक आपत्तियां दर्ज की गई हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे मतदाताओं की है…जो सत्यापन के दौरान अपने घर पर नहीं मिले या दूसरी जगह स्थायी रूप से चले गए हैं।

40 हजार से ज्यादा मतदाता घर पर नहीं मिले

SIR के दौरान 40,906 मामलों में मतदाता घर पर नहीं मिले या उनके दूसरी जगह चले जाने की बात सामने आई है। यह कुल आपत्तियों का करीब 69 प्रतिशत है। अब निर्वाचन अधिकारियों के सामने इन मामलों का दोबारा सत्यापन करना बड़ी चुनौती है।

इसके अलावा 2,575 लोगों के स्थायी रूप से दूसरी जगह चले जाने की शिकायत दर्ज हुई है। वहीं 804 मामलों में मतदाता की मृत्यु, 143 मामलों में कम उम्र, 205 मामलों में भारतीय नागरिक नहीं होने और 607 मामलों में आपत्ति का कारण स्पष्ट नहीं बताया गया है।

एक व्यक्ति ने दर्ज कराईं 5,906 आपत्तियां

SIR के आंकड़ों में सबसे ज्यादा चर्चा किच्छा विधानसभा क्षेत्र की हो रही है। यहां एक व्यक्ति राजेश तिवारी के नाम से अकेले 5,906 आपत्तियां दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।

किच्छा में कुल 8,767 आपत्तियां दर्ज हुई हैं। इस लिहाज से कुल आपत्तियों का बड़ा हिस्सा एक ही व्यक्ति की ओर से दाखिल किया गया है। अब निर्वाचन विभाग के सामने इन सभी आपत्तियों की जांच करना अहम होगा।

हल्द्वानी और जसपुर में भी बड़ी संख्या में आपत्तियां

आपत्तियों की संख्या के मामले में किच्छा के बाद हल्द्वानी और जसपुर का नंबर है। आंकड़ों के अनुसार हल्द्वानी में 7,312, जसपुर में 6,720, काशीपुर में 5,704, रुद्रपुर में 4,958 और गदरपुर में 4,785 आपत्तियां दर्ज हुई हैं।

इसके अलावा झबरेड़ा में 2,333, सितारगंज में 1,612, बाजपुर में 1,475 और हरिद्वार ग्रामीण में 1,400 आपत्तियां दर्ज की गई हैं।

डुप्लीकेट नामों को लेकर भी आपत्तियां

SIR के दौरान 14,358 आपत्तियां ऐसे मामलों में मिली हैं…जिनमें संबंधित व्यक्ति पहले से मतदाता के रूप में दर्ज बताया गया है। इससे मतदाता सूची में दोहरे या गलत नामों की जांच की जरूरत सामने आई है।

रिपोर्ट के मुताबिक 3,233 मामलों में आपत्ति दर्ज कराने वाले व्यक्ति का नाम भी संबंधित मतदाता के नाम के समान पाया गया है।

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज

SIR को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच भी आरोप-प्रत्यारोप चल रहे हैं। कांग्रेस की ओर से आरोप लगाया गया है कि कुछ मतदाताओं को राजनीतिक आधार पर निशाना बनाया जा रहा है। वहीं भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि निर्वाचन आयोग नियमों के अनुसार पूरी प्रक्रिया कर रहा है।

निर्वाचन आयोग की ओर से भी स्पष्ट किया गया है कि सिर्फ आपत्ति दर्ज होने से किसी मतदाता का नाम मतदाता सूची से नहीं हटता। आपत्ति के बाद संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाता है और उसके बाद ही नियमानुसार फैसला लिया जाता है।

अब सबसे बड़ी चुनौती हजारों आपत्तियों की वास्तविकता की जांच करना है। खासकर घर पर नहीं मिले या दूसरी जगह चले गए बताए जा रहे 40,906 मतदाताओं के मामलों के सत्यापन के बाद ही तस्वीर पूरी तरह साफ होगी।

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