
Akhilesh Yadav Statement | Politics | Uttarakhand : समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के उत्तराखंड के लोगों को लेकर दिए गए बयान पर सियासी विवाद तेज हो गया है। उत्तराखंड में भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने इस बयान पर नाराजगी जताई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी अखिलेश यादव के बयान की आलोचना करते हुए कांग्रेस को निशाने पर लिया। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।

अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में घुसपैठियों को लेकर सवाल उठाते हुए उत्तराखंड के लोगों का नाम लिया था। उनके इस बयान के बाद उत्तराखंड में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। भाजपा ने इसे राज्य के लोगों का अपमान बताया है…जबकि इस बयान को लेकर दोनों राज्यों के राजनीतिक संबंधों और क्षेत्रीय पहचान पर भी चर्चा शुरू हो गई है।
अखिलेश यादव के बयान के बाद सोशल मीडिया पर कई लोगों ने उत्तराखंड राज्य आंदोलन और वर्ष 1994 के रामपुर तिराहा कांड का जिक्र किया। उस समय उत्तराखंड को अलग राज्य बनाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे लोग दिल्ली जा रहे थे। इसी दौरान रामपुर तिराहे पर आंदोलनकारियों के साथ पुलिस की कार्रवाई हुई थी। यह घटना उत्तराखंड के इतिहास का एक संवेदनशील अध्याय मानी जाती है।
उस समय उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव की सरकार थी। इस ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के चलते समाजवादी पार्टी को उत्तराखंड में लंबे समय से राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अखिलेश यादव के बयान पर नाराजगी जताई और कांग्रेस पर भी सवाल उठाए। उन्होंने अखिलेश यादव और राहुल गांधी के राजनीतिक संबंधों का जिक्र करते हुए पूछा कि कांग्रेस इस बयान पर क्या रुख अपनाती है।
वहीं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी अखिलेश यादव के बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। इससे साफ है कि इस मामले में प्रदेश के अलग-अलग राजनीतिक नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
राजनीतिक विश्लेषण के लिहाज से यह बयान उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच क्षेत्रीय पहचान और राजनीतिक संबंधों की चर्चा को सामने लाया है। उत्तराखंड वर्ष 2000 में उत्तर प्रदेश से अलग होकर राज्य बना था। इससे पहले दोनों क्षेत्र एक ही राज्य का हिस्सा थे…और आज भी दोनों राज्यों के बीच सामाजिक, पारिवारिक, शैक्षिक और कारोबारी संबंध कायम हैं।
उत्तराखंड मूल के कई नेता उत्तर प्रदेश की राजनीति में अहम पदों पर रहे हैं। गोविंद बल्लभ पंत, हेमवती नंदन बहुगुणा और नारायण दत्त तिवारी जैसे नेता उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। नारायण दत्त तिवारी ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई थी।
दोनों राज्यों के सीमावर्ती जिलों में लोगों का आना-जाना और व्यापारिक गतिविधियां भी जारी रहती हैं। ऐसे में इस तरह के बयानों पर राजनीतिक बहस के साथ-साथ दोनों राज्यों के लोगों के आपसी संबंधों को लेकर भी चर्चा हो रही है।
उत्तराखंड में समाजवादी पार्टी को अब तक सीमित चुनावी सफलता मिली है। राज्य गठन के बाद हुए विधानसभा चुनावों में पार्टी कोई स्थायी राजनीतिक आधार नहीं बना सकी। वर्ष 2004 में सपा के राजेंद्र बाड़ी हरिद्वार से लोकसभा चुनाव जीते थे….लेकिन विधानसभा चुनावों में पार्टी को उल्लेखनीय सफलता नहीं मिली।
अखिलेश यादव के बयान से उत्तराखंड में राजनीतिक विवाद बढ़ा है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस मुद्दे पर भाजपा, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के नेता आगे क्या प्रतिक्रिया देते हैं।



