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उत्तराखंड में परीक्षा व्यवस्था पर बड़ा फैसला, अब गड़बड़ी हुई तो कुलपति से परीक्षा नियंत्रक तक होंगे जिम्मेदार

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Uttarakhand | TechnicalEducation | ExamReforms : उत्तराखंड सरकार ने तकनीकी शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए कई अहम फैसले लिए हैं। विभागीय समीक्षा बैठक में परीक्षा प्रणाली, शिक्षकों की नियुक्ति, रिक्त पदों, निर्माण कार्यों और छात्रों की पढ़ाई से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से सभी लंबित कार्य पूरे करने के निर्देश दिए गए हैं।

बैठक में सबसे बड़ा फैसला परीक्षा प्रबंधन को लेकर लिया गया। अब विश्वविद्यालयों के अधीन संचालित तकनीकी संस्थानों में परीक्षा व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी और गोपनीय तरीके से संचालित करने की जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी। यदि परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो कुलपति, कुलसचिव और परीक्षा नियंत्रक की जवाबदेही तय की जाएगी। जरूरत पड़ने पर नकल विरोधी कानून के तहत भी कार्रवाई की जा सकेगी।

समीक्षा के दौरान यह भी सामने आया कि प्रदेश के राजकीय पॉलीटेक्निक संस्थानों में शिक्षकों की कमी बनी हुई है। इस समस्या को दूर करने के लिए 480 गेस्ट फैकल्टी की नियुक्ति का प्रस्ताव शासन स्तर पर लंबित है। अधिकारियों को इस प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए गए…ताकि नए शैक्षणिक सत्र में छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो।

बैठक में विभिन्न तकनीकी संस्थानों में लंबे समय से खाली पड़े शैक्षणिक और शिक्षणेत्तर पदों को भी जल्द भरने पर जोर दिया गया। अधिकारियों का मानना है कि पर्याप्त शिक्षकों की उपलब्धता से नियमित कक्षाएं, प्रयोगशाला प्रशिक्षण और तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा।

छात्रों की पढ़ाई को व्यवस्थित करने के लिए सभी संस्थानों में शैक्षणिक कैलेंडर लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत कक्षाएं, प्रायोगिक प्रशिक्षण, परीक्षाएं और अन्य शैक्षणिक गतिविधियां तय समय-सारिणी के अनुसार संचालित की जाएंगी, ताकि सत्र समय पर पूरा हो सके।

बैठक में शिक्षकों के कौशल विकास पर भी विशेष जोर दिया गया। इसके लिए फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (एफडीपी) कैलेंडर लागू करने का निर्णय लिया गया है। इस योजना के तहत शिक्षकों को देश के प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों में आधुनिक तकनीक और नई शिक्षण पद्धतियों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

तकनीकी संस्थानों में चल रहे निर्माण कार्यों की भी समीक्षा की गई। गोपेश्वर, उत्तरकाशी, टिहरी, पंतनगर, टनकपुर, पिथौरागढ़, पौड़ी और अल्मोड़ा सहित कई संस्थानों में भवन, प्रयोगशालाओं और अन्य आधारभूत सुविधाओं के निर्माण की प्रगति पर चर्चा हुई। अधिकारियों को सभी परियोजनाएं गुणवत्ता के साथ तय समय सीमा में पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि निर्माण कार्यों में अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि किसी परियोजना में लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी।

तकनीकी शिक्षा विभाग का मानना है कि इन फैसलों के लागू होने से प्रदेश के तकनीकी शिक्षण संस्थानों में शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर होगी…परीक्षा प्रणाली अधिक पारदर्शी बनेगी और छात्रों को समय पर बेहतर शैक्षणिक एवं तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।

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