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भारत के पहले लोकसभा चुनाव का इतिहास, 31 दलों के हाथ रहे थे खाली


India: First: Election: History: लोकसभा चुनाव 2024 की तैयारी शुरू हो गई है। आम चुनाव शुरू होने में वक्त है। भारत में लोकसभा चुनावों का इतिहास बेहद रोचक रहा है और हम एक खास सीरीज़ लेकर आ रहे हैं, जिसमें हम लोकसभा चुनाव के इतिहास के बारे में आपको बताएंगे। वोटिंग इंडिया सीरीज की शुरुआत पहले आम चुनाव से करते हैं। भारत में साल 1952 में लोकसभा चुनाव संपन्न हुए थे। चुनाव 25 October 1951 में शुरू हुए थे जो 21 February 1952 तक चले थे। भारत में हुए पहले आम चुनावों में कुल 53 राजनीतिक दलों ने हिस्सा लिया था। जिसमे से 31 दलों को एक भी सीट नहीं मिली थी। पहले लोकसभा चुनाव में 37 निर्दलीय प्रत्याशियों को भी जीत मिली थी।

भारत के पहले मुख्य चुनाव आयुक्त सुकुमार सेन थे, जो आईसीएस अफसर और गणितज्ञ थे। लोकसभा चुनाव इतिहास का पहला वोट 25 अक्टूबर 1951 में हिमाचल प्रदेश की चिनी तहसील में पड़ा था, जिसने भारत में एक नए युग की शुरुआत की थी। उस समय लोकसभा में कुल 489 सीटें थीं लेकिन संसदीय क्षेत्र 401 ही थे। 314 संसदीय क्षेत्र ऐसे थे, जहां से सिर्फ एक-एक प्रतिनिधि चुने जाने थे। 86 संसदीय क्षेत्र ऐसे थे जहां एक साथ 2 लोगों को सांसद चुना जाना था। इनमें से एक सामान्य वर्ग से और दूसरा सांसद एससी/एसटी समुदाय से चुना गया। एक संसदीय क्षेत्र नॉर्थ बंगाल तो ऐसा भी रहा, जहां से 3 सांसद चुने गए। पहले आम चुनाव में कुल 1874 उम्मीदवारों ने अपना दम दिखाया।

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पहले लोकसभा चुनाव में मतदाता के लिए तब न्यूनतम उम्र 21 वर्ष थी और कुल 36 करोड़ आबादी में करीब 17.3 करोड़ मतदाता थे। पहले आम चुनाव में कुल 45.7 प्रतिशत लोगों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। यानी 10 करोड़ 59 लाख मतदाताओं ने वोट डाले थे। प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की अगुवाई में कांग्रेस ने चुनावों में हिस्सा लिया और एकतरफा जीत हासिल की थी। फूलपुर लोकसभा सीट से जवाहर लाल नेहरू ने बड़ी जीत हासिल की थी। साधारण बहुमत के लिए 245 सीटों की जरूरत थी, लेकिन कांग्रेस ने कुल 489 सीटों में से 364 सीट अपने नाम की थी। दूसरे नंबर पर सीपीआई रही, जिसके खाते में 16 सीटें आईं। 12 सीटों के साथ सोशलिस्ट पार्टी तीसरे स्थान पर रही थी। आज की भाजपा और तब के जनसंघ दल ने 3 सीट हासिल की थी।

कांग्रेस के बाद सबसे ज्यादा वोट शेयर निर्दलियों का रहा, जिन्हें कुल 16 प्रतिशत वोट मिले थे। सोशलिस्ट पार्टी को 10.59, सीपीआई को 3.29 और भारतीय जन संघ को 3.06 प्रतिशत वोट मिले थे। पहले लोकसभा चुनावों में मतपत्र पर नाम और चिन्ह नहीं थे, हर पार्टी के लिए अलग मतपेटी थी, जिन पर उनके चुनाव चिन्ह अंकित कर दिए गए थे। इसके लिए लोहे की दो करोड बारह लाख मतपेटियां बनाई गई थीं और करीब 62 करोड मतपत्र छापे गए थे।

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