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नैनीताल जिले की लालकुआं विधानसभा में हुआ सबसे ज्यादा मतदान, 2014 के मुकाबले ग्राफ गिरा

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हल्द्वानी: लोकसभा चुनाव की शुरुआत गुरुवार को हो गई। इस क्रम में देश के 20 राज्यों में 91 सीटों पर मतदान किया गया। गुरुवार को उत्तराखंड की पांचों लोकसभा सीटों पर 7856268 मतदाता कुल 52 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला ईवीएम में कैद हो गया है। लोकसभा चुनाव के नतीजे 23 मई को सामने आएंगे। राज्य निर्वाचन कार्यालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार इस बार उत्तराखंड में 5 बजे तक 57.85 प्रतिशत मतदान हुआ है।

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लोकसभा क्षेत्र प्रतिशत
टिहरी 54.38%
पौड़ी 49.85%
अल्मोड़ा 48.78%
नैनीताल 66.39%
हरिद्वार 66.24%

वहीं बात 2014 की करें तो उस साल मतदान प्रतिशत 62.15 रहा था।

टिहरी 57.50%
पौड़ी 55.03%
अल्मोड़ा 53.22%
नैनीताल 68.89%
हरिद्वार 71.02%

बात नैनीताल जिले की करें तो मतदान प्रतिशत के मामले में लालकुआं विधानसभा सबसे आगे रहा है। लालकुआं विधानसभा में 69 प्रतिशत मतदान हुआ है। वहीं कालाढूंगी में 67 प्रतिशत, भीमताल 59 प्रतिशत, हल्द्वानी 57 प्रतिशत, नैनीताल में 56 प्रतिशत और रामनगर में 66 प्रतिशत मतदान हुआ।

ईवीएम ने दिया धोखा, कई जगह देरी से मतदान

उत्‍तराखंड की सभी सीटों पर मतदान के दौरान कई स्थानों पर ईवीएम ने भी धोखा दे दिया। ऐसे में करीब 30 मिनट से लेकर एक घंटे तक देरी से मतदान हुआ। इसके चलते मतदाताओं को लाइन में खड़े होकर परेशानी झेलनी पड़ी। गुरुवारसुबह करीब सात बजे से अधिकांश पोलिंग बूथ पर मतदान शुरू हो गया था। वहीं, कई स्थानों पर ईवीएम में तकनीकी दिक्कत के चलते मदतान में देरी आी। हरिद्वार के भगवानपुर विधानसभा क्षेत्र के  सिकरौदा में ईवीएम में खराबी के चलते सुबह 8 बजे मतदान शुरू हो सका। वहीं, इनायतपुर में भी करीब आधे घंटे देरी से मतदान हुआ।

बता दें कि साल 2014 में उत्तराखण्ड लोकसभा की 5 सीटे भाजपा के पक्ष में गई थी। इस बार भी भाजपा ने पीएम मोदी का नाम लेकर पुराना प्रदर्शन दोहराने की कोशिश की। वहीं कांग्रेस ने भ्रष्टाचार और झूठ को मुद्दा बनाते हुए भाजपा को के विजय रथ को रोकने का प्रयास किया है। उत्तराखण्ड में सड़क, हॉस्पिटल , पलायन, रोजगार और शिक्षा का मुद्दा हर चुनाव में उठाया जाता है। पिछले कुछ वक्त से हालात सुधरे जरूर है लेकिन वो विकास कहलाने लायक नहीं हैं।

 

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