
Nainital: High Court: Belbaba: उत्तराखंड हाईकोर्ट को नैनीताल से हल्द्वानी के बेलबाबा क्षेत्र में शिफ्ट करने की योजना को बड़ा झटका लगा है। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की क्षेत्रीय अधिकार प्राप्त समिति ने तराई केंद्रीय वन प्रभाग की 30 हेक्टेयर आरक्षित वन भूमि पर हाईकोर्ट परिसर बनाने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है।

दरअसल, हाईकोर्ट को हल्द्वानी स्थानांतरित करने के लिए बेलबाबा क्षेत्र में 30 हेक्टेयर वन भूमि की मांग की गई थी। प्रस्तावित निर्माण के लिए 123 पेड़ों के कटान की योजना थी। लेकिन समिति ने पाया कि प्रस्ताव तैयार करते समय वन संरक्षण अधिनियम और संबंधित नियमों के तहत गैर-वन भूमि के विकल्पों का पर्याप्त परीक्षण नहीं किया गया।
इस मामले में नैनीताल के तत्कालीन जिलाधिकारी की ओर से बेलबाबा में हाईकोर्ट शिफ्ट करने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। इसके खिलाफ अधिवक्ता कौशल साह जगाती ने केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने इस संबंध में हाईकोर्ट में भी याचिका दायर की थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया था। अब समिति की रिपोर्ट अधिवक्ता कौशल साह जगाती और कार्तिकेय हरि गुप्ता को प्राप्त हुई है। हालांकि, रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।
समिति की बैठक में हाईकोर्ट की ओर से दलील दी गई थी कि नैनीताल स्थित मौजूदा परिसर में मुकदमों और कर्मचारियों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी के चलते जगह की कमी हो रही है। वर्ष 2010 में जहां मुकदमों की संख्या करीब 4,000 थी, वहीं अब यह बढ़कर 64,000 से अधिक हो चुकी है। इसके अलावा नैनीताल में पर्यटन सीजन के दौरान यातायात का दबाव, जाम और वादकारियों को महंगे होटलों में ठहरने जैसी समस्याओं का भी हवाला दिया गया।
हालांकि, मंत्रालय की क्षेत्रीय अधिकार प्राप्त समिति ने जिला प्रशासन की ओर से गैर-वन भूमि उपलब्ध नहीं होने का प्रमाण पत्र दिए जाने पर गंभीर आपत्ति जताई। गौरतलब है कि इससे पहले गौलापार में करीब 4,238 पेड़ों के कटान और आवासीय भवन निर्माण से जुड़े प्रस्ताव को भी समिति ने 24 जनवरी 2024 को खारिज कर दिया था।
इस बार भी वन संरक्षण एवं संवर्द्धन नियम, 2023 के प्रावधानों के तहत बेलबाबा में हाईकोर्ट निर्माण के प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिल सकी है। ऐसे में नैनीताल से हल्द्वानी हाईकोर्ट स्थानांतरित करने की योजना फिलहाल मुश्किलों में घिरती नजर आ रही है।



