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उत्तराखंड: सरकार का इंतजार करते-करते थक गए ग्रामीण, अब खुद फावड़ा उठाकर बनाने लगे सड़क

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Chamoli Road | Sakand Village | Rural Road Demand : कर्णप्रयाग विकासखंड के सकंड गांव के ग्रामीण लंबे समय से सड़क सुविधा की मांग कर रहे हैं, लेकिन लगातार मांग और पत्राचार के बावजूद जब गांव तक सड़क नहीं पहुंची तो ग्रामीणों ने अब खुद ही सड़क बनाने का फैसला कर लिया। ग्रामीण अपने निजी संसाधनों और श्रमदान के जरिए सड़क निर्माण के काम में जुट गए हैं।

गांव तक सड़क पहुंचाने के लिए ग्रामीणों ने गेती, फावड़ा, बेलचा और दूसरे औजार उठाए और खुद रास्ता तैयार करने का काम शुरू किया। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से सड़क की मांग की जा रही है….लेकिन उन्हें अब तक सिर्फ आश्वासन ही मिलते रहे हैं।

ग्रामीणों के मुताबिक सड़क नहीं होने से सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्गों, बीमार लोगों, महिलाओं और बच्चों को होती है। किसी व्यक्ति के बीमार पड़ने पर उसे पैदल सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। इसके बाद ही वाहन से उसे कर्णप्रयाग या अस्पताल तक ले जाना संभव हो पाता है।

सड़क की सुविधा नहीं होने का असर गांव की रोजमर्रा की जिंदगी पर भी पड़ रहा है। ग्रामीणों को जरूरी सामान लाने और कृषि उपज को बाजार तक पहुंचाने में परेशानी होती है। आपात स्थिति में मरीज को अस्पताल पहुंचाना भी ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है।

ग्रामीणों का कहना है कि गांव को सड़क से जोड़ने के लिए कई बार सर्वे किए जा चुके हैं….लेकिन इसके बाद भी सड़क निर्माण शुरू नहीं हो सका। वर्तमान में ग्रामीणों को करीब नौ किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ रहा है।

जनवरी में भी उठाई थी सड़क की मांग

सड़क निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीणों ने पांच और छह जनवरी को आंदोलन किया था। ग्रामीणों के अनुसार उस समय विधायक अनिल नौटियाल के आश्वासन के बाद दो दिन बाद आंदोलन समाप्त कर दिया गया था। ग्रामीणों का कहना है कि विधायक ने तीन महीने के भीतर सड़क का सर्वे कराने और जल्द सड़क कटिंग का काम शुरू कराने का आश्वासन दिया था….लेकिन निर्धारित समय बीतने के बाद भी सड़क का काम शुरू नहीं हुआ।

इसके बाद ग्रामीणों ने अपने स्तर से सड़क बनाने का निर्णय लिया। ग्रामीणों का कहना है कि उनका यह कदम जिम्मेदार विभागों और शासन-प्रशासन का ध्यान गांव की समस्या की ओर खींचने के लिए है।

वन भूमि को लेकर भी सामने आई बात

उपजिलाधिकारी कर्णप्रयाग अल्केश नौटियाल ने कहा कि सकंड गांव के ग्रामीणों द्वारा अपने संसाधनों से सड़क निर्माण किए जाने की जानकारी उनके संज्ञान में आई है। उन्होंने बताया कि जिस स्थान पर ग्रामीण सड़क बना रहे हैं…वह वन भूमि के अंतर्गत आता है। इस संबंध में संबंधित विभागों को भी जानकारी दी जा रही है।

ग्राम प्रधान के नेतृत्व में जुटे ग्रामीण

ग्राम प्रधान शिवानी चौधरी के नेतृत्व में वीरेंद्र सिंह, दाताराम, देवली, रघुवीर सिंह, गजेंद्र सिंह, उषा देवी, सरस्वती देवी समेत अन्य ग्रामीण सड़क निर्माण में जुटे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे लंबे समय से सड़क का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन जब सरकारी स्तर पर काम आगे नहीं बढ़ा तो उन्होंने खुद रास्ता बनाने की शुरुआत की।

चुनाव बहिष्कार की चेतावनी

ग्रामीणों ने अब चेतावनी दी है कि अगर आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सकंड गांव को सड़क सुविधा से नहीं जोड़ा गया तो वे वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव का बहिष्कार कर सकते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसी स्थिति पैदा होती है तो इसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

ग्रामीणों की मांग है कि सकंड गांव को सड़क से जोड़ने के लिए सरकारी स्तर पर जल्द ठोस कदम उठाए जाएं और सड़क निर्माण को स्वीकृति देकर काम शुरू कराया जाए।

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