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भटियाणा गांव में फैली अगरबत्ती की खुशबू, नंदी देवी के काम ने बनाई महानगरों में पहचान

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Tharali: Nandi Devi: पहाड़ की मिट्टी और मेहनत की खुशबू अब ‘तपौवन’ ब्रांड की अगरबत्ती और धूपबत्ती के जरिए बाजारों तक पहुंच रही है। विकासखंड थराली की ग्राम पंचायत भटियाणा निवासी नंदी देवी ने नवंबर 2020 में सीमित संसाधनों के साथ अगरबत्ती एवं धूपबत्ती निर्माण का छोटा कारोबार शुरू किया था। मेहनत, निरंतर प्रयास और सही मार्गदर्शन के दम पर उनका यह प्रयास आज लगभग ₹1 लाख प्रतिमाह के कारोबार में बदल चुका है।

नंदी देवी की सफलता ग्रामीण महिला उद्यमिता और आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल बनकर सामने आई है। ग्रामोत्थान परियोजना (REAP), जय मां भवानी स्वयं सहायता समूह और आस्था महिला आजीविका स्वायत्त सहकारिता, कुलसारी से जुड़ने के बाद उन्हें स्वरोजगार के लिए मार्गदर्शन, प्रोत्साहन और वित्तीय सहयोग मिला। वर्ष 2024 में REAP के माध्यम से उन्हें ₹75 हजार की वित्तीय सहायता मिली, जबकि व्यवसाय के विस्तार के लिए उन्होंने ₹1.50 लाख का ऋण भी लिया।

चुनौतियों को अवसर में बदला

कारोबार की शुरुआत नंदी देवी के लिए आसान नहीं थी। कच्चे माल की व्यवस्था, उत्पाद की गुणवत्ता बनाए रखना और बाजार तलाशना उनके सामने बड़ी चुनौतियां थीं। उन्होंने ग्राहकों की पसंद और बाजार की मांग को समझते हुए उत्पादों की गुणवत्ता और सुगंध पर लगातार काम किया। धीरे-धीरे स्थानीय बाजार में उनके उत्पादों को पहचान मिलने लगी और ग्राहकों का भरोसा बढ़ता गया।

मांग बढ़ने के साथ उन्होंने उत्पादन और बाजार का दायरा भी बढ़ाया। भटियाणा गांव से शुरू हुआ ‘तपौवन’ अब कुलसारी, थराली, देवाल, ग्वालदम, नारायणबगड़, कर्णप्रयाग, पौड़ी, देहरादून और ऋषिकेश सहित उत्तराखंड के कई बाजारों तक पहुंच चुका है।

कई राज्यों से आता है कच्चा माल

अगरबत्ती और धूपबत्ती के उत्पादन के लिए कुछ कच्चा माल स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराया जाता है, जबकि अन्य सामग्री विभिन्न शहरों और राज्यों से मंगाई जाती है। प्रिंटिंग सामग्री गाजियाबाद, तेल दिल्ली और परफ्यूम अहमदाबाद से प्राप्त किया जाता है। उत्पादन में कूपम, ग्वारगम, जिगत, काऊ डंग पाउडर, वुडन धूल, चारकोल धूल, डीईपी ऑयल और विभिन्न सुगंधित तेलों का इस्तेमाल किया जाता है।

REAP से मिले वित्तीय सहयोग का उपयोग कच्चे माल की उपलब्धता बढ़ाने, उत्पादन क्षमता विकसित करने और कारोबार के विस्तार में किया गया। इसका परिणाम यह रहा कि एक छोटे ग्रामीण उद्यम ने व्यवस्थित व्यवसाय का रूप ले लिया।

4-5 महिलाओं को मिला रोजगार

नंदी देवी का उद्यम केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने गांव की अन्य महिलाओं को भी अपने साथ जोड़ा। वर्तमान में रोशनी जोशी, रेखा देवी, नंदी देवी और बुदली देवी सहित अन्य महिलाएं अगरबत्ती एवं धूपबत्ती निर्माण में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। उनके उद्यम से 4-5 ग्रामीण महिलाओं को प्रत्यक्ष रोजगार मिल रहा है।

इससे महिलाओं को गांव में ही काम और आय का अवसर मिल रहा है। साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन और महिला उद्यमिता को भी बढ़ावा मिल रहा है।

बेटे पंकज ने बढ़ाया कारोबार का दायरा

नंदी देवी की सफलता में उनके पुत्र पंकज का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने बाजार से संपर्क बढ़ाने, उत्पादों की बिक्री को व्यापक बनाने और नए बाजारों तक पहुंच बनाने में अपनी मां का साथ दिया। मां के हुनर और बेटे की मेहनत ने मिलकर घर से शुरू हुए छोटे कारोबार को सफल व्यवसाय में बदल दिया।

नंदी देवी का कहना है कि यदि किसी महिला को सही अवसर, उचित मार्गदर्शन और थोड़ा सहयोग मिले, तो वह अपने जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती है। उनके अनुसार, स्वयं सहायता समूह और ग्रामोत्थान परियोजना से मिले सहयोग ने उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के साथ-साथ उद्यम को आगे बढ़ाने का आत्मविश्वास भी दिया।

देशभर में ‘तपौवन’ पहुंचाने का लक्ष्य

अब नंदी देवी का लक्ष्य ‘तपौवन’ ब्रांड को उत्तराखंड के बाजारों से आगे देश के अन्य राज्यों तक पहुंचाना है। वह चाहती हैं कि अधिक से अधिक ग्रामीण महिलाएं उनके साथ जुड़ें और अपने हुनर को व्यवसाय में बदलकर आत्मनिर्भर बनें।

भटियाणा गांव से नवंबर 2020 में शुरू हुआ नंदी देवी का सफर आज ‘तपौवन’ के रूप में कई बाजारों तक पहुंच चुका है। अगरबत्ती और धूपबत्ती की खुशबू के साथ उनका यह उद्यम पहाड़ की महिला शक्ति, स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की कहानी भी दूर-दूर तक पहुंचा रहा है।

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