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उत्तराखंड विधानसभा के आखिरी दिन उमेश कुमार का इस्तीफा, हंगामे के बीच अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हुआ सदन

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Uttarakhand Politics | Umesh Kumar Resignation | Assembly Session : उत्तराखंड विधानसभा के मौजूदा सरकार के अंतिम सत्र के आखिरी दिन सियासी हलचल तेज हो गई। खानपुर के निर्दलीय विधायक उमेश कुमार ने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपना इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी को सौंपा। स्पीकर ने इस्तीफा मिलने की पुष्टि करते हुए इसे नियमानुसार आगे की कार्रवाई के लिए प्रभारी सचिव के पास भेज दिया।

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इस्तीफे से पहले उमेश कुमार ने अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की। उन्होंने कहा कि वह दुखी और व्यथित हैं। उनके मुताबिक जिस जिले से वह आते हैं वहां के मुद्दों को भी सदन में मजबूती से नहीं उठा पा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि दूसरे विधायक उनके साथ खड़े होकर इन मुद्दों पर आवाज नहीं उठा रहे हैं।

विधायक उमेश कुमार ने विपक्ष से भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि पिछले साढ़े चार साल से उन्हें उम्मीद थी कि विपक्ष भ्रष्टाचार के मामलों, जनता की समस्याओं और किसानों से जुड़े मुद्दों पर उनका साथ देगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

उमेश कुमार ने कहा कि अब हालात ऐसे हो गए हैं कि उन्हें अकेले ही लड़ाई लड़नी पड़ रही है। उनके इस बयान और इस्तीफे ने विधानसभा सत्र के अंतिम दिन राजनीतिक चर्चाओं को तेज कर दिया।

अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हुआ सत्र

27 और 28 अक्टूबर को आयोजित उत्तराखंड विधानसभा का सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। यह मौजूदा सरकार का अंतिम विधानसभा सत्र था। अब अगले विधानसभा चुनाव के बाद सदन की तस्वीर बदल सकती है और कई नए चेहरे नजर आ सकते हैं।

इस बार सत्र की अवधि भी काफी कम रही। करीब डेढ़ दिन में सदन की कार्यवाही समेट दी गई और कुल मिलाकर लगभग आठ घंटे ही कामकाज हुआ।

विधानसभा सत्र के अंतिम दिन सदन में जमकर हंगामा हुआ। विरोध प्रदर्शन के दौरान काले झंडे दिखाए गए और प्रश्नावली फाड़े जाने की घटना भी सामने आई। हंगामे के चलते प्रश्नकाल भी नहीं चल पाया।

चुनाव से पहले होने वाले संयुक्त फोटो सेशन में विपक्ष की गैरमौजूदगी भी चर्चा का विषय रही। इस तरह मौजूदा सरकार का अंतिम सत्र कम अवधि, हंगामे और विधायक उमेश कुमार के इस्तीफे के कारण सुर्खियों में रहा।

अब विधानसभा की अगली बैठक नई सरकार के गठन के बाद होगी। उससे पहले सभी राजनीतिक दलों के सामने चुनावी मैदान में उतरने और जनता के बीच अपने कामकाज का हिसाब रखने की चुनौती होगी।

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