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उत्तराखंड: 8 गुना महंगी गैस बिजली से यूपीसीएल ने बनाई दूरी, 321 मेगावाट प्लांट की बिजली खरीद घटी

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Power Cost | UPCL | Uttarakhand | Electricity : उत्तराखंड की बिजली व्यवस्था में वर्ष 2016-17 में लिया गया एक फैसला अब भी असर डाल रहा है। 321 मेगावाट क्षमता वाले गैस आधारित बिजली संयंत्रों के साथ किए गए दीर्घकालीन बिजली खरीद करार के तहत बिजली की लागत काफी ज्यादा तय हुई थी। मौजूदा समय में महंगी गैस बिजली के कारण यूपीसीएल को इन संयंत्रों से बिजली खरीद काफी सीमित करनी पड़ रही है।

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वर्ष 2026-27 के लिए गैस आधारित बिजली की स्वीकृत औसत लागत 31.71 रुपये प्रति यूनिट बताई गई है। इसके मुकाबले अन्य स्थायी स्रोतों से मिलने वाली बिजली की औसत लागत 4.23 रुपये प्रति यूनिट है। इस हिसाब से गैस आधारित बिजली करीब आठ गुना महंगी पड़ रही है।

महंगी बिजली का असर सिर्फ बिजली खरीद तक सीमित नहीं रहता। इसकी लागत बिजली कंपनियों के खर्च में शामिल होती है…और इसका असर आगे चलकर बिजली व्यवस्था और उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है।

गैस आधारित संयंत्रों की कुल स्थापित क्षमता 321 मेगावाट है। इसके बावजूद 2026-27 के लिए इन संयंत्रों से सिर्फ 472.80 मिलियन यूनिट बिजली की उपलब्धता स्वीकृत की गई है।

आंकड़े बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में इन संयंत्रों से स्वीकृत बिजली उपलब्धता लगातार कम हुई है। वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा 1370.83 मिलियन यूनिट था। 2025-26 में यह घटकर 1223.45 मिलियन यूनिट रह गया। अब 2026-27 में इसे और घटाकर 472.80 मिलियन यूनिट कर दिया गया है।

अगर 2024-25 के आंकड़े से तुलना करें तो दो साल में गैस आधारित संयंत्रों से स्वीकृत बिजली उपलब्धता करीब 65.5 प्रतिशत कम हो गई है। यानी एक तरफ 321 मेगावाट की स्थापित क्षमता के लिए दीर्घकालीन करार बना हुआ है वहीं दूसरी तरफ महंगी बिजली के कारण इन संयंत्रों से बिजली लेने की मात्रा लगातार घट रही है।

इस स्थिति से यह साफ है कि गैस आधारित बिजली की ऊंची लागत यूपीसीएल के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। सस्ती बिजली उपलब्ध होने के दौर में महंगे स्रोतों से बिजली खरीद को सीमित रखना पड़ रहा है।

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