
Uttarakhand News | Tobacco Ban | Public Health : उत्तराखंड सरकार ने गुटखा, पान मसाला और तंबाकूयुक्त उत्पादों पर प्रतिबंध लगाकर जनस्वास्थ्य की दिशा में कदम उठाया है। इस फैसले का मकसद लोगों, खासकर युवाओं और किशोरों को तंबाकू के नुकसान से बचाना है। राज्य में यह प्रतिबंध एक साल के लिए लागू किया गया है।

इस साल तंबाकूयुक्त उत्पादों पर प्रतिबंध लगाने वाले राज्यों में उत्तराखंड भी शामिल हो गया है। इससे पहले ओडिशा, झारखंड, महाराष्ट्र और कर्नाटक में भी ऐसे प्रतिबंध लगाए गए है।
तंबाकू से कैंसर समेत कई गंभीर बीमारियों का खतरा
गुटखा और तंबाकूयुक्त पान मसाले का सेवन मुंह और गले के कैंसर सहित कई गंभीर बीमारियों का जोखिम बढ़ाता है। इससे दांतों और मसूड़ों को नुकसान पहुंच सकता है। लंबे समय तक सेवन करने से मुंह खोलने में परेशानी भी हो सकती है…जिससे खाना खाने और रोजमर्रा के कामों पर असर पड़ता है।
तंबाकू में मौजूद निकोटीन की लत लग सकती है। यही वजह है कि नियमित सेवन करने वाले लोगों के लिए इसे छोड़ना मुश्किल हो जाता है। तंबाकू से होने वाली बीमारियों का असर व्यक्ति के साथ उसके परिवार पर भी पड़ता है। इलाज का खर्च बढ़ने और काम करने की क्षमता प्रभावित होने से आर्थिक परेशानियां भी पैदा हो सकती हैं।
प्रतिबंध के साथ निगरानी और जागरूकता भी जरूरी
तंबाकूयुक्त उत्पादों पर प्रतिबंध को प्रभावी बनाने के लिए नियमों का पालन कराना जरूरी है। इसके लिए बिक्री और वितरण पर निगरानी रखनी होगी। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के साथ लोगों को जागरूक करना भी अहम होगा।
स्कूलों, कॉलेजों और समुदायों में जागरूकता अभियान चलाकर बच्चों और युवाओं को तंबाकू के दुष्प्रभावों की जानकारी दी जा सकती है। वहीं तंबाकू की लत छोड़ने की कोशिश कर रहे लोगों को परामर्श और नशामुक्ति सेवाएं उपलब्ध कराना भी जरूरी है।
प्रतिबंध के साथ जागरूकता, नियमित निगरानी और उपचार की सुविधाओं पर ध्यान देने से तंबाकू के सेवन को कम करने में मदद मिल सकती है।



