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40 साल की उम्र में 40 साल का सघंर्ष , रोहित ने मां दिलाया सबसे बड़ा सम्मान

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हल्द्वानीः मंगलवार की शाम आई खबर ने उत्तराखंड के हर व्यक्ति की आखें नम कर दी। दिग्गज नेता स्व एनडी तिवारी के बेटे रोहित शेखर की मौत की खबर ने लगभग उत्तराखंड , लखनऊ और दिल्ली के युवको को सदमें में डाल दिया। रोहित शेखर के संघर्षों की कहानी से हर एक व्यक्ति प्रभावित हुए है। अपनी मां उज्जवला को हक दिलाने के लिए रोहित ने हर एक लड़ाई लड़ी फिर चाहे वह कोर्ट तक का ही सफर क्यो ना हो। रोहित ने पिछले सास ही शादी करी थी पर शादी के 11 माह बाद ही रोहित की मौत हो गई। रोहित की शादी उनकी मित्र अपूर्वा से हुई थी।रोहित शेखर ने अपनी मां को हक दिलाने के लिए 15 साल की उम्र से ही रोहित ने अपनी लड़ाई शुरू कर दी थी। करीब 10 साल तक रोहित ने अपनी मां के लिए कानूनी लड़ाई भी लड़ी। रोहित को 2014 में बेचे का हक प्राप्त हुआ। मां और पिता के लिए लड़ने वाले रोहित को 5 साल पूरे भी पिता का प्यार नहीं मिला। 2014 मे जब स्व एनडी तिवारी ने रोहित और मां उज्जवला को अपनाया तब रोहित ने ही अपने माता-पिता की शादी कराई थी। शादी के बाद जब रोहित को पिता का प्यार मिला तो कुछ समय बाद ही स्व तिवारी की तबीयत खराब होने लगी। रोहित ने फिर से पिता के स्वास्थ के लिए संघर्ष शुरू किया।  पिता की सेवा में रोहित और मां उज्जवला ने दिन-रात एक कर के ऱख दिया। पिता के स्वास्थ के चलते रोहित ने जल्द-से-जल्द अपनी दोस्त अपूर्वा से शादी करली। रोहित बताते थे कि स्व तिवारी रोहित को प्यार से गुंजनू कह कर पुकारते थे।

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11 माह में ही छोड़ गये रोहित , संघर्षों से रहा नाता

रोहित शेखर को जब पिता के रूप में एनडी तिवारी का साथ मिला तब उत्तराखंड के राजनेताओं के मन में एक डर सा बैठ गया था। पिता के साथ रोहित की हल्द्वानी में सक्रियता ने विधानसभा में सबसे ज्यादा सुर्खिया बटोरी। विधानसभा चुनाव के बिच ही रोहित शेखर ने भाजपा का दामन थाम लिया। रोहित को भाजपा की सदस्यता दिलाने पिता कांग्रेस के दिग्गज नेता स्व एनडी तिवारी खुद दिल्ली अमित शाह के निवास पहुचे पर खुद स्व तिवारी ने भाजपा की सदस्यता नहीं ली। भाजपा से पहले रोहित पिता के साथ सपा के दरवाजे तक भी गये। पर सपा के वरिष्ट नेता मुलायम सिंह ने स्व तिवारी की दोस्ती के कारण यूपी सरकार में दायित्वधारी के रूप में रोहित को जगह दी। जिसके बाद रोहित भाजपा में सामिल हुए।

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