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बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में 28 साल बाद आया फैसला, सभी आरोपी बरी हुए

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नई दिल्ली: कुछ देर पहले अयोध्या की बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि आरोपियों ने ढांचा गिराया है, इसके पर्याप्त सबूत नहीं है। इसके अलावा कोर्ट ने कहा कि बाबरी ढांचे को अराजक तत्वों ने गिराया था और इसमें विश्व हिंदू परिषद का हाथ कोई नहीं है। इस मामले में भाजपा के वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह, उमा भारती, विनय कटियार समेत सभी 32 आरोपियों को बरी कर दिया है। पढ़ना जारी रखें…

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बता दे कि 6 दिसंबर 1992 में बाबरी मस्जिद के गिरने के 7 दिन बाद ही केस सीबीआई को सौंपा गया था। इस मामले की अलग-अलग जिलों में सुनवाई हुई, जिसके बाद इलाहबाद हाईकोर्ट ने 1993 में सुनवाई के लिए लखनऊ में विशेष अदालत का गठन किया था। तब सीबीआई ने अपनी संयुक्त चार्जशीट फइल की। इस चार्जशीट में ही बाल ठाकरे, नृत्य गोपाल दास, कल्याण सिंह, चम्पत राय जैसे 49 नाम जोड़े गए। 2011 में सीबीआई सुप्रीम कोर्ट गई। पढ़ना जारी रखें…

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सीबीआई ने अपनी याचिका में दोनों मामलों को संयुक्त रूप से लखनऊ में बनी विशेष अदालत में चलाने और आपराधिक साजिश का मुकदमा जोड़ने की बात कही। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चलती रही। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने दो साल में इस केस को खत्म करने की समय सीमा भी तय कर दी। 2019 अप्रैल में वह समय सीमा खत्म हुई तो नौ महीने की डेडलाइन फिर मिली। इसके बाद कोरोना संकट को देखते हुए 31 अगस्त तक सुनवाई पूरी करने का और 30 सितंबर को फैसला सुनाने का समय दिया गया था।

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