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उत्तराखंड: MBBS दाखिले के लिए फर्जी प्रमाणपत्र का खेल? अब SIT खोलेगी पूरी परत

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Fake Certificate | SIT Investigation | MBBS Admission | Uttarakhad : MBBS दाखिले के लिए कथित फर्जी स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र तैयार किए जाने के मामले में पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रेमेंद्र सिंह डोबाल ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल यानी SIT का गठन किया है।

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SIT की कमान ऋषिकेश की एसपी जया बलोनी को सौंपी गई है। टीम में सीओ सदर अंकित कंडारी, सीओ रायपुर वंदना वर्मा, क्लेमेंटाउन थाना प्रभारी लोकपाल परमार, रायपुर थाना प्रभारी संजीत कुमार और दोनों मामलों के विवेचक शामिल हैं।

पुलिस के मुताबिक, SIT सबसे पहले यह पता लगाएगी कि स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र बनाने की पूरी प्रक्रिया क्या थी। प्रमाणपत्र के लिए रिपोर्ट किस स्तर पर तैयार हुई, किन लोगों ने उसे तैयार किया और आगे किस तरह भेजा गया…इन सभी बिंदुओं की जांच की जाएगी।

जांच के घेरे में प्रमाणपत्र बनवाने के लिए इस्तेमाल किए गए कॉमन सर्विस सेंटर यानी CSC भी आएंगे। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि इन प्रमाणपत्रों के लिए आवेदन किसने किया और संबंधित दस्तावेज CSC तक कैसे पहुंचे।

मामले में नाम सामने आए लोगों से भी पूछताछ की जाएगी। पुलिस यह जानने का प्रयास करेगी कि कथित प्रमाणपत्र बनवाने की सलाह उन्हें किसने दी थी…और इसके पीछे किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका तो नहीं थी।

पुलिस को आशंका है कि जांच केवल सामने आए दो मामलों तक सीमित नहीं रह सकती। SIT यह भी पता लगाएगी कि इस तरह के प्रमाणपत्र कहीं और इस्तेमाल किए गए हैं या नहीं और क्या इसके पीछे किसी संगठित नेटवर्क की भूमिका है।

स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र के लिए पहचान पत्र, मूल स्वतंत्रता सेनानी प्रमाणपत्र या कार्ड, पेंशन संबंधी दस्तावेज, निवास प्रमाणपत्र और पारिवारिक संबंध साबित करने वाली वंशावली जैसे दस्तावेजों की जरूरत होती है। SIT इन दस्तावेजों को उपलब्ध कराने और तैयार करने की प्रक्रिया की भी जांच करेगी।

मामला सामने आने के बाद जिलाधिकारी स्तर से जांच कराई गई थी। जांच में एक मामले में आधार कार्ड से जुड़ी जानकारी और बताए गए पते को लेकर सवाल सामने आए। स्थानीय स्तर पर की गई पड़ताल में भी संबंधित परिवार के उस पते पर रहने की पुष्टि नहीं होने की बात सामने आई।

दूसरे मामले में राजस्व विभाग की रिपोर्ट के आधार पर आरोप लगाया गया कि MBBS दाखिले के लिए स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र बनवाने के दौरान इस्तेमाल किए गए आधार कार्ड कथित तौर पर फर्जी पाए गए। मौके पर की गई जांच में भी बताए गए पते पर संबंधित लोगों के निवास की पुष्टि नहीं होने की बात सामने आई।

इन मामलों के बाद रायपुर और क्लेमेंटाउन थाने में मुकदमे दर्ज किए गए। अब SIT पूरे मामले में दस्तावेजों की जांच, संबंधित लोगों से पूछताछ और प्रमाणपत्र तैयार होने की प्रक्रिया की पड़ताल करेगी।

पुलिस की जांच आगे बढ़ने के बाद यह साफ होगा कि कथित फर्जी प्रमाणपत्र कैसे तैयार हुए, इन्हें तैयार कराने में किन लोगों की भूमिका थी और MBBS दाखिले में इनका इस्तेमाल किस तरह किया गया।

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