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टनकपुर : इन बच्चों के हुनर के आगे विज्ञान भी नतमस्तक है

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चंपावत : कई चीजें विज्ञान से भी परे हैं हम आज आपको एक ऐसी ही खबर बताने जा रहे हैं जिसे पढकर आप जरूर सोच में पढ जाएंगे । हर व्यक्ति में पांच बाह्य इंद्रियां जैसे आंख, कान, नाक, त्वचा, जीभ होती है। उसी तरह हमारे भीतर पांच सूक्ष्म इंद्रियां भी होती हैं। जिन्हें हम छठी इंद्री, तीसरी आंख, सांइटिफिक पावर, परामानसिक क्षमता जैसे नामों से पुकारते हैं। यह सूक्ष्म शक्तियां हमारी बाह्य इंद्रियों की अपेक्षा एक हजार गुना अधिक शक्तिशाली होती हैं। दाएं और बाएं दिमाग का संतुलन, मिडब्रेन एक्टीवेशन का मुख्य कार्य है।

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टनकपुर के रहने वाले इन दो मासूमों की जादुई कला ने क्षेत्र में सभी को चौंका रखा है। बंद आंखों से सुई में धागा पिरो दे रहे हैं तो टीवी देखना, मोबाइल चलाना, पूरी किताब पढ़ देना इनके लिए नई बात नहीं है। लेकिन इनके इन करतबों से हर कोर्इ भौंचक्का है। राजकीय इंटर कॉलेज चल्थी में तैनात शिक्षक दुर्ग विजय यादव अपने दो बच्चों सलोनी यादव(14 वर्ष) और आदित्य यादव(11 वर्ष) के साथ टनकपुर में रहते हैं। दोनों बच्चे पढ़ने में काफी कमजोर थे। खासतौर पर बेटी सलोनी। फिर किसी ने शिक्षक दुर्ग विजय को करिमेटिव मिडब्रेन एक्टिवेशन के बारे में बताया। जब उन्होंने उसके बारे में सितारगंज में चल रही एकेडमी में पता किया और बच्चों को इसका कोर्स कराया। तब से दोनों बच्चों का बौद्धिक और मानसिक स्तर इतना तेज हुआ कि वे आंखों पर पट्टी बांधकर फर्राटे से अखबार पढ़ते हैं। तो सूंघकर रंगों की पहचान कर बता देते हैं।

मोबाइल स्क्रीन की तस्वीर छूकर किसकी है, यह बताने से लेकर साइकिल तक चला रहे हैं। सलोनी ने बताया कि आंख पर पट्टी बांधने के बाद उन्हें सभी चीजें माथे के बीच में दिखाई देती हैं। आदित्य कहते हैं कि इसके करने से उनका पढ़ाई में भी अधिक मन लगने लगा है। अब वह अपना होमवर्क भी आंख बंद करके ही करते हैं। वह कोई भी पाठ चुटकियों में याद कर सकती है। वो कार्टून, मोबाइल गेम और वीडियो देखने में अपना समय बर्बाद नहीं करते, बल्कि पूरा ध्यान पढ़ाई में लगाते हैं।

इससे बच्चों की स्मरण शक्ति में वृद्धि होती है। आत्मविश्वास बढ़ता है। अर्ध जागृत मन का विकास होता है और दिमाग का संतुलन, एकाग्रता में वृद्धि, सृजनात्मकता में वृद्धि, भावनाओं पर नियंत्रण और शैक्षणिक कार्यों में कुशलता आती है।शिक्षक यादव ने बताया कि यह कोर्स जन्म से दृष्टिहीन बच्चे नहीं कर सकते हैं। जो बच्चे जन्म से किसी दुर्घटना में अपनी आंखों की रोशनी खो देते हैं, उन बच्चों के लिए यह कोर्स काफी लाभदायक है। बशर्ते उन्हें रंगों की जानकारी होनी चाहिए।

 

 

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