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जन्माष्टमी पर हल्द्वानी की इस अनोखी वाटिका की करें सैर, भगवान कृष्ण से जुड़े हैं यहां के 5 पौधे

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Haldwani News | Janmashtami | Krishna Vatika : जन्माष्टमी के मौके पर भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं को जानने के साथ प्रकृति से जुड़ी खास जानकारी भी हासिल की जा सकती है। हल्द्वानी के रामपुर रोड स्थित उत्तराखंड वानिकी अनुसंधान केंद्र में बनी कृष्ण वाटिका इसी वजह से खास है। इस वाटिका में ऐसे पांच पौधों को जगह दी गई है….जिनका संबंध भगवान कृष्ण से जुड़ी मान्यताओं और कथाओं से माना जाता है।

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कृष्ण वाटिका में कदंब, कृष्णावट, कृष्ण कमल, वैजयंती और मौलश्री जैसे पौधे मौजूद हैं। इन पौधों का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व अलग-अलग बताया जाता है।

कदंब का श्रीकृष्ण से खास जुड़ाव

कृष्ण से जुड़ी कथाओं में कदंब के पेड़ का कई जगह उल्लेख मिलता है। वृंदावन और भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं से भी इसे जोड़ा जाता है। इसी कारण कदंब को कृष्ण वाटिका में प्रमुख स्थान दिया गया है।

कृष्णावट को कहा जाता है माखन कटोरी

कृष्णावट को माखन कटोरी के नाम से भी जाना जाता है। इसके पत्तों की विशेष बनावट इसे दूसरे पौधों से अलग बनाती है। धार्मिक मान्यताओं के चलते इसे भगवान कृष्ण से संबंधित पौधों में शामिल किया गया है।

कृष्ण कमल भी है खास

कृष्ण कमल अपने आकर्षक फूल के लिए जाना जाता है। इसके नाम और इससे जुड़ी मान्यताओं के कारण इसे भी कृष्ण वाटिका में संरक्षित किया गया है।

वैजयंती और मौलश्री को भी मिली जगह

कृष्ण वाटिका में वैजयंती और मौलश्री के पौधे भी लगाए गए हैं। वैजयंती का संबंध भगवान कृष्ण से जुड़ी धार्मिक परंपराओं में बताया जाता है। वहीं मौलश्री को मोलसरी और बकुल के नाम से भी जाना जाता है।

एक ही परिसर में कई थीम आधारित वाटिकाएं

उत्तराखंड वानिकी अनुसंधान केंद्र में सिर्फ कृष्ण वाटिका ही नहीं….बल्कि अलग-अलग धार्मिक और सांस्कृतिक विषयों पर आधारित कई वाटिकाएं विकसित की गई हैं। इनमें राम वाटिका, रामायण वाटिका, महाभारत वाटिका और बुद्ध वाटिका सहित अन्य थीम आधारित क्षेत्र शामिल हैं।

इन वाटिकाओं के माध्यम से धार्मिक-सांस्कृतिक महत्व वाली वनस्पतियों को एक जगह संरक्षित करने और लोगों को उनके बारे में जानकारी देने का प्रयास किया गया है।

पौधों के संरक्षण और प्रसार पर भी काम

कृष्ण से जुड़ी मानी जाने वाली इन वनस्पतियों के संरक्षण के साथ इनके प्रसार पर भी ध्यान दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य इन प्रजातियों को सुरक्षित रखना और लोगों को इनके प्राकृतिक व सांस्कृतिक महत्व से परिचित कराना है।

जन्माष्टमी के अवसर पर कृष्ण वाटिका भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी मान्यताओं और वनस्पतियों को करीब से समझने का एक अलग अनुभव देती है।

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