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हल्द्वानी के युवा क्रिकेट खिलाड़ियों ने नम आंखों से दी अटल बिहारी वाजपयी जी को श्रद्धांजलि


हल्द्वानी: देश के लिए पिछले दो दिन शोक भरे रहे हैं। स्वतंत्रता दिवस के दिन भारत ने अपने सबसे पहले क्रिकेट कप्तान को खोया तो 16 अगस्त को भारतीय राजनीति के हीरो अटल बिहारी वाजपयी जी हम सभी को छोड़कर चले गए। दोनों के निधन के बाद भारत के एक युग खत्म हुआ है।

हिमालयन क्रिकेट एकेडमी के निर्देशक गिरि मलकानी व हेड कोच दानसिंह कन्याल व सहायक कोच कमल

एक ने खेल में देश का लोहा मनवाया तो दूसरे ने पवित्र राजनीति विश्व के सामने रखी। हल्द्वानी कमुलुवागांजा स्थित हिमालयन क्रिकेट एकेडमी में शुक्रवार को अटल बिहारी वाजपयी और अजीत वाडेकर को श्रद्धांजलि दी गई। इस मौके पर एकेडमी के खिलाड़ी व सपोर्ट स्टाफ ने दो मिनट का मौन रखा और पुष्प अर्पित भी किए।

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अजित वाडेकर

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान अजीत वाडेकर का बुधवार रात मुंबई के जसलोक हॉस्पिटल में निधन हो गया। वे 77 साल के थे। वेस्ट इंडीज (1971) और इंग्लैंड में सीरीज जीतने वाले वाडेकर भारत के पहले कप्तान थे। 1 अप्रैल 1941 को जन्मे वाडेकर ने 1966 में भारत के लिए पहला टेस्ट खेला था।

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आठ साल के करियर में उन्होंने 37 टेस्ट खेले। उन्होंने टेस्ट में एक शतक और 14 अर्धशतक की मदद से कुल 2113 रन बनाए। सरकार ने उन्हें 1967 में अर्जुन अवॉर्ड और 1972 में पद्मश्री से सम्मानित किया।

अटल बिहारी वाजपयी

ये नाम भारतीय राजनीति में सबसे बड़ा है, जिसका स्थान कोई नहीं ले सकता है। अटल ने अपनी पवित्र राजनीति ने विरोधियों के दिल पर भी वास किया।

उन्होंने उपनी राजनीति अपनी साफ चरित्र की तरह साफ रखी, जिसकी मिसाल विरोधी दल भी देता है। अटल जी ने 16 अगस्त शाम 5 बजकर 5 मिनट में अंतिम सांस ली और शुक्रवार को राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। अटल जी के निधन के बाद पूरे देश में शोक लहर दौड़ पड़ी है। उनकी अंतिम यात्रा में सैकड़ो लोगों सैलाब उमड़ पड़ा।

हिमालयन क्रिकेट एकेडमी के कोच दान सिंह कन्याल ने कहा कि देश ने खेल और राजनीति में दो बड़े स्तम्ब को खोया है। दोनों का चरित्र युवाओं के लिए एक उदाहरण पेश करता है।  अजीत वाडेकर जी ने देश के खेल के मैदान पर वो काम किया जिसने भारतीय टीम की दिशा ही बदल दी। विश्व में टीम को नई पहचान मिली और उन्होंने सिखाया है कैसे जोश से क्रिकेट खेली जाती है।

वहीं अटल जी का चरित्र इंसान पूरे भारतवर्ष के लिए उदाहरण है। वो अपने दल के अलावा विरोधियों के दिल में भी वास करते थे जो दिखाता है कि जरूरी नहीं है कि ऊंचा स्थान किसी के विरोध में खड़ा होकर पाया जाए। खिलाड़ियों को इससे सिखना चाहिए है कि मैदान पर जो भी है वो खेल भावना के साथ हो। कोच दान सिंह कन्याल ने खिलाड़ियों को पूर्व कप्तान सचिन तेंदुलकर और राहुल द्रविड़ का उदाहरण दिया। इस मौके पर हिमालयन क्रिकेट एकेडमी के निर्देशक गिरीश मेलकानी , धीरेन्द्र डालाकोटी , नरेंद्र पंत ,कमल व अभिभावक मौजूद रहे।

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