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होम्योपैथिक इलाज से दूर होगा साइटिका का अहसाह दर्द, साहस होम्यो वीडियो टिप्स

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हल्द्वानी: आज की फास्ट लाइफ में एक रोग से मुक्त शरीर किसी वरदान से कम नहीं है। रोग से मुक्त शरीर रखने के लिए स्वस्थ्य दिनचर्या की जरूरत होती है जो आज के वक्त में मुमकिन नजर नहीं आती है।आधुनिक युग में खान-पान की कमी, व्यायाम से दूर रहना और बढ़ता शहरी प्रदूषण ना चाहते हुए भी व्यक्ति को बड़े रोगों की चपेट में ले आता है। हल्द्वानी साहस क्लीनिक के डॉक्टर एनसी पांडे  साइटिका के बारे में बताने दा रहे है जो 30 से 40 वर्ष की आयु के अधिकतम लोगों को सताने लगता है।  इस रोग में  दोनों टांगों में से किसी एक टांग में बर्दाश्त ना करने वाला दर्द होता है। यह दर्द कभी-कभी इतना बढ़ जाता है कि व्यक्ति चलने में भी परेशानी होती है।

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साइटिका नाड़ी, जिसका उपरी सिरा लगभग 1 इंच मोटा होता है, प्रत्येक नितंब के नीचे से शुरू होकर यह नाड़ी टांग के पिछले भाग से गुजरती हुई पांव की एड़ी पर खत्म होती है।इस नाड़ी का नाम इंग्लिश में साइटिका नर्व है। इसी नाड़ी में जब सूजन और दर्द के कारण पीड़ा होती है तो इसे वात शूल अथवा साइटिका का दर्द कहते है। इस रोग का आरंभ अचानक और तेज दर्द के साथ होता है। 30 से 40 साल की उम्र के लोगों में ये समस्या आम होती है।वैसे तो साइटिका का दर्द एक समय मे सिर्फ एक ही टांग में होता है, लेकिन सर्दियों के दिनों में ये दर्द और भी बढ़ जाता है। रोगी को चलने में कठिनाई होती है। सोते, उठते या बैठते समय कई बार टांग की पूरी नस खिंच भी जाती है, जिसके कारण बहुत तकलीफ़ होती है। हल्द्वानी साहस क्लीनिक के डॉक्टर एनसी पांडे ने साइटिका की परेशानी को दूर करने के लिए होम्योपैथिक इलाज बताया

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