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क्या आपका गांव भी है इस खतरे की जद में? उत्तराखंड के 3947 गांव हाई-रिस्क जोन में

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Tuberculosis Alert | Health Screening | Uttarakhand Health : उत्तराखंड में तपेदिक (टीबी) को लेकर स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ती जा रही है। प्रदेश के कई गांवों में संक्रमण के मामले सामने आने के बाद सरकार और स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी और जांच अभियान तेज करने के निर्देश दिए हैं।

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स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार राज्य में 4216 ऐसे गांव चिन्हित किए गए हैं जहां टीबी संक्रमण का खतरा अधिक है। इनमें 3947 गांवों को हाई-रिस्क श्रेणी में रखा गया है…हालांकि अब तक केवल 2493 गांवों में ही स्क्रीनिंग का काम पूरा हो पाया है। बड़ी संख्या में गांव अभी भी जांच के दायरे से बाहर हैं।

बताया गया है कि हर वर्ष प्रदेश में करीब 28 हजार नए टीबी मरीज सामने आ रहे हैं। यही वजह है कि सरकार इस बीमारी की रोकथाम और समय पर जांच को लेकर गंभीर नजर आ रही है। स्क्रीनिंग अभियान की धीमी प्रगति वाले जिलों पर भी विशेष निगरानी रखी जा रही है।

उत्तरकाशी, टिहरी, चमोली, पौड़ी, देहरादून, नैनीताल, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ और हरिद्वार जैसे जिलों में जांच की रफ्तार अपेक्षाकृत कम है। इन क्षेत्रों में अभी तक लक्षित आबादी के बड़े हिस्से की स्क्रीनिंग नहीं हो सकी है।

केंद्र सरकार ने उत्तराखंड में 14 लाख ग्रामीणों की जांच का लक्ष्य निर्धारित किया है। अब तक करीब पांच लाख लोगों की स्क्रीनिंग पूरी हुई है…जबकि दस लाख से अधिक लोगों की जांच अभी बाकी है।

प्रदेश में टीबी नियंत्रण कार्यक्रम के तहत 13 जिला टीबी केंद्र, 98 ब्लॉक स्तरीय इकाइयां और 157 जांच केंद्र कार्यरत हैं। इसके अलावा 131 आधुनिक जांच मशीनें और 33 पोर्टेबल एक्स-रे मशीनों की मदद से अभियान को आगे बढ़ाया जा रहा है। जल्द ही 19 नई मशीनें भी उपलब्ध कराई जाएंगी।

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि समय पर जांच और उपचार से टीबी पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। इसके लिए लोगों से भी स्वास्थ्य जांच अभियान में सहयोग करने की अपील की गई है।

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