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कर्णप्रयाग रेलवे टर्मिनस बनेगा परियोजना का सबसे बड़ा स्टेशन, टेंडर खुल गए

Karnaprayag Railway Terminus
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RishikeshKarnaprayagRailProject : KarnaprayagTerminus : RailwayConstruction : UttarakhandDevelopment : RVNL : RailwayTenders : ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना में एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। परियोजना के पैकेज दो और चार में शामिल कर्णप्रयाग, देवप्रयाग, जनासू, मलेथा और श्रीनगर के वित्तीय टेंडर खुल चुके हैं। इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद अब सभी 13 स्टेशनों की निर्माण प्रक्रिया पूरी तरह से ट्रैक पर आ गई है।

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कर्णप्रयाग स्टेशन इस परियोजना का सबसे बड़ा स्टेशन होगा और इसे टर्मिनस के रूप में विकसित किया जाएगा…जिसमें कुल 26 रेल लाइनें बिछेंगी। तकनीकी टेंडर पहले ही खुल चुके थे अब वित्तीय टेंडर भी खुल जाने के बाद कंपनियों को तीन महीने का समय दिया गया है, ताकि निर्माण कार्य शुरू किया जा सके।

सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस परियोजना में ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक कुल 126 किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन बनाई जाएगी….जो 17 सुरंगों से होकर गुजरेगी। सबसे लंबी सुरंग देवप्रयाग से जनासू के बीच 14.08 किलोमीटर लंबी है…जबकि सबसे छोटी सुरंग 200 मीटर लंबी है। 11 सुरंगों की लंबाई छह किलोमीटर से अधिक है।

परियोजना में शामिल अन्य स्टेशन हैं: बीरभद्र, योगनगरी ऋषिकेश, शिवपुरी, व्यासी, देवप्रयाग, जनासू, मलेथा, श्रीनगर (चौरास), धारी देवी, रुद्रप्रयाग (सुमेरपुर) घोलतीर, गौचर और कर्णप्रयाग (सेवई)।

रेल विकास निगम लिमिटेड ने इस परियोजना को दिसंबर 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। वर्तमान में 13 में से दो स्टेशनों में संचालन शुरू हो चुका है दो पर निर्माण कार्य चल रहा है…और शेष स्टेशनों के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।

उप महाप्रबंधक सिविल आरवीएनएल ओपी मालगुड़ी ने कहा कि सभी पैकेज में निर्माण कार्य तीन महीने के भीतर शुरू कर दिया जाएगा। परियोजना के पूरा होने के बाद उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में यातायात और पर्यटन को नई गति मिलेगी।

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