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कुमाऊं की लाइफ लाइन “केमू बस सर्विस”… आजादी से पहले शुरू हुए सफर को पूरे हुए 88 वर्ष

KEMU Bus Service
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KMOU Bus History | Kumaon Motor Union | Uttarakhand Transport | Nainital News | KMOU 88 Years :  एक भावुक कर देने वाली कहानी सामने आई है…एक ऐसी बस सेवा की…जिसने सिर्फ यात्रियों को नहीं…बल्कि पूरे कुमाऊं की जिंदगी को जोड़ा। बात हो रही है कुमाऊं मोटर यूनियन (KMOU) की…जिसने आज 88 साल पूरे कर लिए हैं।

14 अप्रैल 1939 को शुरू हुई यह बस सेवा उस दौर में आई…जब पहाड़ों में सफर बेहद कठिन हुआ करता था। संकरी और घुमावदार सड़कों पर चलने वाली यह बस कुमाऊं के लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं थी। पंडित गोविंद बल्लभ पंत की दूरदर्शिता से परिवहन व्यवस्था को संगठित करते हुए इसकी नींव रखी गई थी।

नौ लोगों ने मिलकर इस ऐतिहासिक सेवा की शुरुआत की। धीरे-धीरे केमू बस सिर्फ एक परिवहन सेवा नहीं रही…बल्कि कुमाऊं की पहचान बन गई। यह बस यात्रियों के साथ-साथ चिट्ठियां, मनीऑर्डर, अनाज और लोगों की उम्मीदें भी एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाती रही।

इतिहास गवाह है कि देश की सेवा में भी केमू पीछे नहीं रही। आजादी के दौर से लेकर युद्ध के समय तक इसने सैनिकों और उनके परिवारों के बीच एक अहम कड़ी का काम किया। यहां तक कि उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान भी केमू बसों ने अपनी भूमिका निभाई।

हालांकि आज हालात बदल चुके हैं। जिस केमू ने दशकों तक पहाड़ को जोड़े रखा। वही अब सरकारी उपेक्षा का शिकार होती नजर आ रही है। पुराने दफ्तर खंडहर में तब्दील हो चुके हैं और कई जगह किराए के भवनों से काम चल रहा है। इसके बावजूद, केमू आज भी 366 रूटों पर सेवा दे रही है और रोजाना हजारों लोग इससे सफर करते हैं। लेकिन अवैध वाहनों की बढ़ती संख्या और सरकारी समर्थन की कमी ने इसकी हालत कमजोर कर दी है।

एक समय कुमाऊं की धड़कन रही यह बस सेवा आज संघर्ष कर रही है। अगर समय रहते इसे संबल नहीं मिला…तो यह विरासत सिर्फ किस्सों और पुरानी यादों तक सिमट कर रह जाएगी।

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