National News

बजरंगबली पर योगी के बयान से सियासी पारा चढ़ा… जाति पर क्या बोले बीजेपी सांसद

Ad

नई दिल्ली। राजस्थान चुनाव प्रचार के दौरान अलवर में यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ द्वारा बजरंगबली पर दिए गए बयान से विवाद बढ़ता जा रहा है। एक ओर जहां विपक्ष ने इसे वोट पाने का रणनीति बताया है, वहीं दूसरी ओर एक्सपर्ट का कहना है कि पुराने समय में लोग जातियों में नहीं बंटे थे। बता दें कि यूपी के बहराइच जिले में पहुंचे योगी आदित्यनाथ से जब इस बाबत पत्रकारों ने सवाल पूछा, तो सीएम योगी ने इस पूरे मामले पर चुप्पी साध ली, या चुप्प रहना ही बेहतर समझा ।
बता दें कि बजरंगबली पर दिए गए बयान के कारण ब्राह्मण सभा ने योगी आदित्यनाथ को नोटिस भी भेजा है। तो वहीं इस मामले पर डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित ने सीएम का नाम लिए बिना अपनी फेसबुक वॉल पर लिखा, ‘देवी-देवताओं की जाति और धर्म को न ढूंढ़ें। हमारे लिए वो आस्था का विषय हैं, आपके लिए हो सकता है राजनीति का हो। हमने तो कभी नहीं सुना कि हनुमान जी दलित थे या महिषासुर दलित था। वैदिक काल में न तो धर्म थे न जाति ।
तो वहीं इस मामले पर एमपी के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिह ने भी योगी के बयान पर तंज कसा। दिग्विजय ने ट्विटर पर लिखा, ‘बीजेपी का अजेंडा है कि राम मंदिर विवाद चलता रहे, हजारों करोड़ की मूर्तियां बनवाओ, हनुमान जी को जातिवर्ग में शामिल करो, विज्ञान को पीछे करके किवदंतियों को आगे लाओ और जुमलों के सहारे जनता को सपने दिखाओ ।
विपक्ष के हमले को देखते हुए बीजेपी सांसद उदित राज ने योगी के बयान पर कहा, ‘स्थापित हो चुका है कि रामराज्य के समय भी दलित हुआ करते थे। उस समय जाति व्यवस्था थी। लोग चुनाव में कहते हैं कि जाति के हिसाब से वोट नहीं पड़ना चाहिए, लेकिन ऐसा होता नहीं है। लोगों का जोर जाति पर ज्यादा होता है। तभी योगीजी ने जाति के नाम पर अपील की है।

ADVERTISEMENTS Ad

सर्व ब्राह्मण समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित सुरेश मिश्रा ने कहा, कि बजरंगबली की पूजा हर जगह होती है। उनके प्रति हिंदू समाज की गहरी आस्था है। ऐसे में उन्हें दलित बताकर जातिगत सियासत का कार्ड खेलना बेहद शर्मनाक है। इससे हिंदू समाज की भावनाएं आहत हुई हैं। योगी को माफी मांगनी चाहिए ।

ADVERTISEMENTS Ad
To Top