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वन कर्मियों की दीपावली छुट्टी रद्द ,रामनगर कॉर्बेट पार्क में रेड अलर्ट जारी



रामनगर: उत्तराखंड कॉर्बेट राष्ट्रीय उघान भारत का सबसे पुराना राष्ट्रीय पार्क है जो की उत्तराखंड के नैनीताल जिले के रामनगर के पास स्थित है । इस पार्क को बंगाल बाघ की रक्षा के लिए हेली नेशनल पार्क के रूप में स्थापित किया गया था। इसे बाघ परियोजना पहल के तहत आने वाला पहला पार्क माना जाता है । हर साल नंवबर से लेकर मई तक पार्क में पर्यटकों का जमावड़ा लगा रहता है ।

इसी के चलते इस बार दिवाली को लेकर कार्बेट पार्क में रेड अलर्ट जारी किया गया है ।आशंका है कि शिकारी बड़ी मात्रा में उल्लू का शिकार करने को निकलेंगे इसलिए वन कर्मियों की दिवाली छुट्टी को रद्द करने के आदेश दिए गए हैं । कार्बेट के बिजरानी , झिरना , गर्जिया और ढेला जोन में सैलानी जंगल सफारी करेंगे।

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दिपावली के चलते हर साल वन्यजीवों के शिकार की घटनाएं सामने आती हैं । मगर इस बार जीवों को कोई नुकसान ना हो इसके लिए पूरी तरह से तैयारियां की गई है । पार्क वार्डन आर. के तिवारी ने बताया कि ई- सर्विस सिस्टम पर कर्मचारियों की तैनाती की गई है , जो की थर्मल कैमरों की जद में आने वाली हर एक गतिविधियों पर नज़र रखेंगे । सुबह से शाम तक कैमरो से निगरानी रखी जाएगी। इसमें किसी भी तरह से कोई लापरवाही की गुंजाइश नहीं होगी । किसी भी प्रकार की हलचल को तुरंत जांचने के आदेश दिए गए हैं । साथ ही सभी डीएपओ , रेंजरों के गश्त पर निगरानी रखने के आदेश दिए गए है । यूपी की सीमा से सटे इलाकों पर सबसे ज्यादा फोकस किया जाएगा ।

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रामनगर वन प्रभाग के डीएफओ चंद्रशेखर जोशी व तराई पश्चिमी वन प्रभाग के डीएफओ बीएस शाही ने भी अलर्ट जारी किया है। इन दोनों वन प्रभाग के जंगलों की सीमाएं खुली हैं और यहां पर शिकारियों के घुसने की सबसे ज्यादा आशंका है। ऐसे में इन वन कर्मियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। वहीं , राजाजी टाइगर रिजर्व प्रशासन ने पहले ही अधिकारियों , कर्मचारियों के अवकाश पर रोक लगा दी है । इसके अलावा टाइगर रिजर्व क्षेत्र के हिरण , कांकड़, सांभर, उल्लू आदि वन्यजीवों के शिकार करने वालों पर निगरानी के आदेश दिए गए हैं।

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आपको बता दे की दीपावली के दौारान उल्लू की जान सांसत में रहती है । तंत्र पूजा के कारण भी दिवाली की अमावस्या के दिन उल्लू के शिकारियों के सक्रिय होने की आशंका रहती है। उल्लू को भले ही अशुभ माना जाता है , लेकिन यह संपन्ना का प्रतीक है । यही धार्मिक मान्यता ही इसकी दुश्मन बन गई है। इसी कारण दीपावली पर उल्लू की तस्करी बढ़ जाती है ।

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