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भारत में क्रिकेट धर्म… खिलाड़ियों और फैंस के बीच ”भावनाओं ” का पवित्र रिश्ता

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नई दिल्ली:पंकज पांडे: क्रिकेट… एक ऐसा खेल जो कुछ ही देशों में खेला जाता है। कुछ देश इसलिए क्योंकि फुटबॉल के मुकाबले ये संख्या बेहद कम है। केवल 12 देश ही आईसीसी के प्रमुख सदस्य हैं। इन 12 देशों की टीमें खेलती हैं और हम उसे विश्व क्रिकेट कहते हैं। वैसे क्रिकेट कुल 104 देशों में खेला जाता है और भारत इस खेल की जान है। ये कहना गलत नहीं होगा कि भारत ही क्रिकेट को विश्वभर में विख्यात कर रहा है। भारत में क्रिकेट धर्म है और क्रिकेटर भगवान… आप और मुझ जैसे क्रिकेट फैंस को भक्त कह सकते हैं।

क्रिकेटर भी एक इंसान हैं

क्रिकेट भारत को एक मजबूत बंधन में जोड़ता है और इस बंधन का नाम है भावना। भारत की जनसंख्या 140 करोड़ के पास है। देश में क्रिकेट को प्यार मिलता है तो गालियों का भी सामना करना पड़ता है। भारतीय टीम जीत हासिल करती है तो फैंस उनके लिए कुछ भी करने के लिए तैयार हो जाते हैं लेकिन एक हार कई सवाल खड़े कर देती है, यहां तक की खिलाड़ियों के चरित्र व उनकी निष्ठा पर भी सवाल उठते हैं। क्रिकेट में पैसा खूब है लेकिन हार के बाद हम ये भूल जाते हैं कि क्रिकेटर भी एक इंसान हैं। भारतीय क्रिकेट की सेवा उनके लिए एक नौकरी जैसा है। हम जैसे करोड़ों लोग नौकरी के बाद घर जाते हैं लेकिन क्रिकेटर एक होटल के कमरे में होता है। भले ही उनके रुपए और रहन-सहन की चमक हमारे आंखों से कभी नहीं हटे लेकिन कभी कोई पिक्टर परफ्केट नहीं होती है।

केवल फैंस की भावनाओं के लिए

बदलते वक्त के साथ क्रिकेट भी बदला है और बदलते क्रिकेट ने भारतीय क्रिकेटर्स के बारे में इतना तो बताया है कि वो अपने फैंस के लिए ही जीते हैं। पिछले कुछ सालों में भारत में क्रिकेट को बढ़ावा देने के लिए कई लीग शुरू हो गई है। बतौर क्रिकेट फैंस मैं सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ हूं रिटायर खिलाड़ियों के मैदान पर उतने के फैसले ने…सचिन तेंदुलकर, वीरेंद्र सहवाग, युवराज सिंह और कई विदेशी खिलाड़ी भी, जो भारत आकर रोड सेफ्टी वर्ल्ड सीरीज़ और लेजेड्स लीग में भाग ले रहे हैं। एक भारतीय खिलाड़ी अपने करियर में इतना रुपए तो कमा ही लेगा कि उसे बाद में रुपए लेकर क्रिकेट खेलने की जरूरत नहीं पड़े। मैदान के बाहर भले ही हम रिटायरमेंट के बाद उनके मैदान पर उतरने के फैसले को रुपए से तोल दें लेकिन ऐसा नहीं है। शुरू में आपकों बताया था कि ये खेल भारतीयों को ”भावनाओं” के बंधन में जोड़ता है। फैंस की इसी भावनाओं के लिए खिलाड़ी मैदान पर उतर रहे हैं। भारत में क्रिकेट धर्म हैं और ये देश एक बार फिर पूरी दुनिया में इस धर्म का प्रचार-प्रसार कर रहा है। रिटायरमेंट से पहले बीसीसीआई ये काम करती हैं फिर खिलाड़ी खुद ऐसा कर रहे हैं।

आंखों देखा हाल

कुछ वक्त पहले हम मैच देखने के लिए देहरादून पहुंचे थे। महान सचिन तेंदुलकर को कभी देखा नहीं था तो इस वजह से रोड सेफ्टी वर्ल्ड सीरीज देखने के लिए पहुंचे। देहरादून में लगातार हो रही बारिश के वजह से दो मैच पहले ही रद्द हो गए थे। जब हम मैदान पर पहुंचे तो आउटफील्ड गीला था। मैच 7.30 बजे शुरू होना था लेकिन उसे 9 बजे कर दिया गया। पिछले 25 साल से मैच देख रहा हूं, भारत के बजाए मैच कहीं और होता तो रद्द हो जाता लेकिन यहां नहीं हुआ। खराब आउट फील्ड होने के बाद भी खिलाड़ियों ने मैदान पर उतरने का फैसला किया। स्टेडियम में पहुंचे 25 हजार दर्शकों की भावनाओं के लिए खिलाड़ी मैदान पर उतरे, जिसने एक बात साफ कर दी कि क्यों भारत में ये खेल धर्म है और इसकी सेवा करने वाले लोग भी इस पर आंच नहीं आने देंगे। रिटायर खिलाड़ियों की लीग व सीरीज़ ने शाहरुख खान के उस डायलॉग की याद दिला दी… अगर पूरी शिद्दत से किसी चीज़ को चाहो तो सारी कायनात आपको उससे मिलाने में जुट जाती है।

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