
Simli Base Hospital | Chamoli Protest | Uttarakhand Health Services : चमोली जिले में सिमली बेस अस्पताल को पूर्ण अस्पताल का दर्जा देने की मांग को लेकर आंदोलन तेज हो गया है। क्षेत्र के 50 से ज्यादा गांवों के ग्रामीण पैदल मार्च करते हुए देहरादून के लिए रवाना हुए हैं। आंदोलनकारियों ने साफ कहा है कि अगर अस्पताल को पूरी तरह चालू करने की मांग पूरी नहीं हुई तो वे 2027 के विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करेंगे।

सिमली बेस अस्पताल संघर्ष समिति के नेतृत्व में 12 अक्टूबर को शुरू हुई इस पदयात्रा में बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हैं। ग्रामीणों ने बेस नहीं तो वोट नहीं का नारा लगाते हुए सरकार से अस्पताल को पूर्ण बेस अस्पताल का दर्जा देने की मांग उठाई। प्रदर्शनकारी पारंपरिक वाद्ययंत्रों और मांगों से जुड़े बैनर लेकर कर्णप्रयाग की ओर बढ़े।
आंदोलनकारियों का कहना है कि सिमली में महिला अस्पताल का निर्माण करीब 12 साल पहले हुआ था…लेकिन अब तक यह पूरी तरह से संचालित नहीं हो पाया है। क्षेत्र के लोग लंबे समय से यहां स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाने और अस्पताल को पूर्ण बेस अस्पताल का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि मांग को लेकर अब तक शासनादेश जारी नहीं हुआ है।
सिमली अस्पताल संघर्ष समिति के संयोजक देवेंद्र सिंह ने बताया कि क्षेत्र के 50 से ज्यादा गांवों के लोग इस आंदोलन में शामिल हैं। इनमें महिलाओं की संख्या अधिक है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण करीब 200 किलोमीटर पैदल चलकर देहरादून पहुंचेंगे और 20 अक्टूबर को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात करेंगे। जब तक अस्पताल को पूरी तरह चालू करने की मांग पूरी नहीं होती…आंदोलन जारी रहेगा।
समिति के मुताबिक पदयात्रा में शामिल लोग रोजाना करीब 30 से 40 किलोमीटर पैदल चल रहे हैं। सोमवार शाम तक उनके रुद्रप्रयाग पहुंचने और मंगलवार को श्रीनगर में रुकने का कार्यक्रम बताया गया है। इसके बाद यात्रा आगे बढ़ेगी।
संघर्ष समिति का कहना है कि 9 नवंबर 2024 को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गैरसैंण से सिमली बेस अस्पताल को पूर्ण अस्पताल का दर्जा देने की घोषणा की थी। समिति का आरोप है कि घोषणा के बाद भी अब तक शासनादेश जारी नहीं हुआ है। इसी के विरोध में ग्रामीण 20 अक्टूबर को देहरादून में मुख्यमंत्री आवास कूच करेंगे।
समिति ने देहरादून में रह रहे चमोली जिले के लोगों से भी आंदोलन में शामिल होने की अपील की है। ग्रामीणों का कहना है कि अस्पताल को पूरी तरह चालू करने से क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी और इलाज के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा।



