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चित्रा बिष्ट ने नौकरी छोड़कर शुरू किया अपना काम,पहाड़ की पहचान के लिए STARTUP को दिया ‘पिछौड़ा’ नाम


Haldwani: Chitra Bisht Pichora Story: उत्तराखंड में पलायन की बात पिछले दो दशकों से हो रही है। राज्य गठन के बाद से पलायन की रफ्तार में बढ़ोतरी हुई है। जो लोग पलायन कर चुके हैं, उनका कहना हैं कि संसाधनों की कमी की वजह से वो बढ़ती दुनिया के साथ मुकाबला नहीं कर सकते हैं। इसके अलावा मेडिकल व शिक्षा सुविधाओं का अभाव होने के चलते उन्हें गांव छोड़ना पड़ा। इस तरह के कई उदाहरण मिल जाएंगे लेकिन पलायन को रिवर्स पलायन में बदलने के लिए उत्तराखंड में ‘स्वरोजगार’ को युवाओं ने हथियार बनाया है। अब तो सरकार ने भी तमाम योजनाएं शुरू कर दी है लेकिन इसका श्रेय उनको जाता है जिन्होंने इस दिशा में ना सिर्फ काम किया बल्कि सैंकड़ो युवाओं को भी प्रेरित किया है।

हल्द्वानी की चित्रा बिष्ट का स्टार्टअप

उत्तराखंड में कोरोनाकाल के बाद से स्वरोजगार की ओर रिकॉर्ड संख्या में युवाओं ने रुख किया है। कई अच्छी नौकरी में थे लेकिन पहाड़ में रहकर काम करने के इरादे ने कुछ वक्त के लिए कम्फर्ट जोन छोड़कर चुनौतियों का सामना करने का फैसला किया है। इस लिस्ट में हल्द्वानी निवासी चित्रा बिष्ट का नाम भी शामिल हो गया है, जिन्होंने पर्सनल केयर उत्पादों से जुड़ा काम शुरू किया और नाम दिया पिछौड़ा….ये एक हर्बल प्रोडक्ट्स का स्टार्टअप है।

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नौकरी छोड़कर शुरू किया काम

पिछौड़ा की शुरुआत हल्द्वानी लामाचौड़ निवासी चित्रा बिष्ट और उनके भाई मानवेंद्र बिष्ट द्वारा साल 2021 में की गई। इससे पहले चित्रा बिष्ट केबिन क्रू के तौर पर कार्यरत थीं लेकिन उत्तराखंड में रहकर खुद का काम करने की इच्छा के चलते उन्होंने नौकरी छोड़ दी। इस काम को शुरू करने से पहले उन्होंने काफी अध्ययन किया और फिर पर्वतीय क्षेत्रों के किसानों से संपर्क किया। उन्होंने कहा कि पर्सनल केयर उत्पादों को सुरक्षा के साथ बनाए जाना बेहद जरूरी है।

स्टार्टअप पिछौड़ा में बनते हैं हर्बल उत्पाद

चित्रा ने बताया कि हर्बल उत्पाद बनाने के लिए हल्द्वानी में ही एक यूनिट स्थापित की गई है। मुक्तेश्वर, नैनीताल व अन्य पर्वतीय स्थानों के किसान रॉ मटेरियल प्रोवाइड कराते हैं। फिर इन्हें प्रोसेसिंग यूनिट में तैयार किया जाता है। मौजूदा वक्त में पिछौड़ा स्टार्टअप के अंतर्गत पर्सनल केयर से जुड़े 20 से ज्यादा उत्पाद बनाए जाते हैं। इस लिस्ट में हेयर ऑयल, बॉडी स्क्रब, लिप बाम, बॉडी ऑयल, फेस वॉश समेत कई प्रोड्क्ट शामिल हैं। इन सभी उत्पादों की अलग-अलग वैरायटी है। उन्होंने बताया कि लोग ऑनलाइन( www.pichora.in) लेवल पर देशभर में मार्केटिंग कर रहे हैं। इसके अलावा सोशल मीडिया के माध्यम से भी पिछौड़ा के उत्पादों को लोग खरीदते हैं। चित्रा ने बताया कि करीब 10 से ज्यादा लोग पिछौड़ा स्टार्टअप से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं। इसमें किसान और प्रोसेसिंग यूनिट की टीम भी शामिल है।

कहां से आया पिछौड़ा का आइडिया

चित्रा बिष्ट बताती हैं कि बाजार में कई ऐसे उत्पाद है जो नुकसान पहुंचा सकते हैं क्योंकि उनमे कैमिकल होता है। पर्सनल केयर उत्पादों को प्राकृतिक तरीकों से भी बनाया जा सकता है। बतौर उत्तराखंडवासी मुझे मालूम था कि इन उत्पादों को बनाने में सहायक रॉ मटेरियल ( सामाग्री) पहाड़ी क्षेत्रों में मिल जाता है। इस वजह से इस दिशा में काम करने का फैसला किया। वहीं पिछौड़ा उत्तराखंड का एक लोक-परिधान है जिसे शुभ कार्यों में महिलाओं द्वारा धारण किया जाता है। सकारात्मक ऊर्जा से जुड़ते हुए हमने अपने स्टार्टअप को ये नाम दिया है। हमारी कोशिश है कि लोगों को सुरक्षित प्रोड्क्ट मुहैया कराए ताकि उनका विश्वास हर्बल उत्पादों की तरफ बढ़े। बता दें कि हल्द्वानी लामाचौड़ निवासी चित्रा बिष्ट ने आर्यमान विक्रम बिरला स्कूल से इंटर तक की शिक्षा हासिल की। इसके बाद उन्होंने नैनीताल के डीएसबी परिसर से ग्रेजुएशन किया और फिर केबिन क्रू के रूप में काम किया। वर्ष 2021 से वे अपने भाई के साथ पिछौड़ा स्टार्टअप पर काम कर रही है। अपने साथ वो कई लोगों को भी रोजगार दे रही हैं।

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