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उत्तराखंड रोडवेज ने लापरवाह परिचालकों को किया माफ, दोबारा मिलेगा नौकरी का मौका

ऐसे में यात्रियों को होगी परेशानी, उत्तराखंड रोडवेज में चालक-परिचालकों की भयंकर कमी
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हल्द्वानी: अपने ही फैसले को पलटकर रोडवेज हटाए गए परिचालकों को वापिस बुलाने जा रहा है। संविदा, विशेष श्रेणी व आउटसोर्स के जिन परिचालकों को पहले लापरवाही या अन्य वजहों से हटाया था, अब उन्हें परिवहन निगम में दोबारा नौकरी का मौका मिलने जा रहा है। इसके लिए प्रक्रिया शुरू हो गई है।

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दरअसल उत्तराखंड रोडवेज स्टाफ की कमी को देखते हुए पहले हटाए गए परिचालकों को मौका देगा। इसके लिए मुख्यालय ने तीनों रीजनों को पत्र भेजकर एक लिस्ट तैयार करने की बात कही है। लिस्ट में परिचालकों के पूरे ब्यौरे के साथ ये भी बताना अनिवार्य है कि पहले उन्हें किस वजह से हटाया गया था।

इस बात से हर कोई वाकिफ है कि बीते कुछ समय में उत्तराखंड रोडवेज के परिचालक व चालकों ने लापरवाही के कई मामले सामने लाकर खड़े कर दिए हैं। कई परिचालक ड्यूटी को लेकर लापरवाही बरतने, बगैर बताए गायब हो जाने व शिकायत की जांच सत्य पाए जाने पर हटाए गए हैं। इन्हें रोडवेज सस्पेंड या ट्रांसफर की सजा देता है।

हालांकि ये केवल नियमित स्टाफ के लिए है। जबकि अस्थायी परिचालकों की नौकरी तक चली जाती है। आंकड़े बताते हैं कि अबतक 500 लोगों पर कार्रवाई की जा चुकी है। मगर इन सभी के लिए अच्छी बात ये है कि रोडवेज अब इन लोगों को फिर से मौका दे रहा है। इसका एक बड़ा कारण स्टाफ की कमी है। रोडवेज नहीं चाहता कि स्टाफ की कमी से पहले से जो घाटा है, वो बढ़ जाए।

इसी के मद्देनजर अब नैनीताल, टनकपुर व देहरादून रीजन के मंडलीय महाप्रबंधकों को पत्र भेजा गया है तथा उनसे संबंधित सभी डिपो से रिपोर्ट मांगी गई है। गौरतलब है कि तय मानक के अनुसार ये रिपोर्ट सात बिंदुओं पर तैयार की जानी है और दो दिन के भीतर रिपोर्ट मुख्यालय देनी है।

बहरहाल अभी तक लोहाघाट, पिथौरागढ़ व कोटद्वार डिपो के अलावा अन्य किसी डिपो से रिपोर्ट नहीं मिलने पर मुख्यालय ने नाराजगी भी जताई है। इधर, कई एक रिपोर्ट में सभी तथ्यों को शामिल ना किए जाने से नौकरी के आवेदन पर निर्णय लेने में दिक्कत आ रही है। जिस बारे में जीएम कार्मिक आरपी भारती द्वारा भेजे गए दूसरे पत्र में कई डिपो को फटकारा भी गया है।

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