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मां से कहा 22 अक्टूबर को घर आऊंगा लेकिन तिरंगे से लिपटकर गांव पहुंचा एकलौता बेटा विक्रम



देहरादून: एक हफ्ते में उत्तराखंड के तीन जवान शहीद हो गए। जम्मू-कश्मीर के पुंछ में आतंकवादियों को खोजना के सर्च ऑपरेशन जारी है और उसी मुठभेड़ में नई टिहरी के बेटे विक्रम सिंह नेगी भी शहीद हुए। शनिवार को उनका पार्थिव शरीर विमाण गांव पहुंचा। उनके दर्शन करने के लिए सैकड़ों लोग मौजूद रहे। हीद का शव पहुंचते ही उसकी पत्नी, मां और बूढ़ी दादी का बुरा हाल हो गया। विक्रम सिंह नेगी साल 2015 में भारतीय सेना का हिस्सा बने थे। उनकी उम्र केवल 26 साल थी और वह घर के एकलौते चिराग थे।

शनिवार को राजकीय सम्मान के साथ शहीद विक्रम सिंह नेगी का अंतिम संस्कार किया गया। विक्रम नेगी 22 अक्टूबर को पूजा के लिए घर आने वाले थे। उनके माता-पिता और पत्नी विक्रम का इंतजार कर रहे थे लेकिन विक्रम ने घर से पहले देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई और अपने परिवार से हमेशा के लिए दूर हो गए। बीते 17 जुलाई को विक्रम डेढ़ महीने की छुट्टी काटकर ड्यूटी पर गये थे, उस वक्त किसने सोचा था कि अब विक्रम कभी घर नहीं लौटेंगे। 7 दिन बाद यानी 22 अक्टूबर को वो घर आने वाले थे। गुरुवार को सुबह 8 बजे विक्रम ने वीडियो कॉल पर अपनी मां से बात की थी।

शहीद विक्रम में श्रद्धांजलि देने के लिए सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी एयरपोर्ट पहुंचे तो क़ृषि मंत्री सुबोध उनियाल उनके गांव पहुंचे। उन्होंने कहा कि विक्रम का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। सरकार शहीद के परिवार की हर संभव मदद करेगी। क़ृषि मंत्री सुबोध उनियाल भी शनिवार को शहीद विक्रम सिंह नेगी के गांव पंहुचे। इस दौरान उन्होंने गांव की सड़क कोटेश्वर-फलसारी मोटर मार्ग का नामकरण शहीद विक्रम सिंह नेगी के नाम से करने की घोषणा की। वहीं मंत्री ने रोड का डामरीकरण करवाने की भी घोषणा की। कोटेश्वर घाट पर देर शाम को शहीद विक्रम सिंह नेगी का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। 39 फील्ड रेजिमेंट के जवानों ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया।

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