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टीचर और प्रिंसिपल के बिना चलता है तीरथ सागर स्कूल…एक दूसरे को पढ़ाकर कामयाब होते हैं छात्र


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नई दिल्ली: शिक्षा ही सर्वोपरि, इस कथन को कई बार सुना है। स्कूलों में इसे आत्मसात करते हुए भी देखा है। लेकिन क्या आपने कभी स्कूलों की कल्पना बिना टीचर या प्रिंसिपल के की है। यूं तो ऐसी कल्पना कोई नहीं करता लेकिन तीरथ सागर स्कूल के बच्चे अपनी लगन से अनहोनी को होनी में तब्दील कर रहे हैं। महोबा के इस स्कूल में बच्चे बिना किसी टीचर और प्रिंसिपल के पढ़ाई करते हैं।

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गौरतलब है कि आज के दौर में सीमित संसाधन बच्चों की पढ़ाई के आढ़े आते हैं। लेकिन महोबा के युवा संसाधनों की बेड़ियों में खुद के सपनों को बांधने नहीं देना चाहते। यही वजह है कि तीरथ सागर स्कूल ने देखते ही देखते पूरे देश में नाम बना लिया है। दरअसल महोबा में नदी किनारे स्थित ये स्कूल संयुक्त पढ़ाई के मंत्र पर चलता हैं। हैरानी वाली बात है लेकिन यहां बच्चे ही एक दूसरे के टीचर हैं।

जी हां, तीरथ सागर स्कूल में कोई प्रिंसिपल या टीचर नहीं है। बल्कि यहां के छात्र रोज सुबह से शाम तक स्टडी क्लब के जरिए एक दूसरे को पढ़ाते हैं। जैसे कोई गणित में कमजोर है और कोई बहुत अच्छा, तो कमजोर छात्र को पढ़ाने का काम होशियार छात्र का होगा। ऐसे में हजारों छात्रों को अपनी समस्या सुलझाने में आसानी हो जाती है। छात्रों का कहना है कि हम एक दूसरे के लिए हमेशा खड़े रहते हैं।

उल्लेखनीय है कि तीरथ सागर स्कूल का एक एक छात्र किसी खूबी का धनी है। बता दें कि तीरथ सागर से निकलकर तमाम छात्र देश के बड़े बड़े पदों तक पहुंचे हैं। यहां सब छात्र सरकारी नौकरी, प्रशासनिक सेवाओं के लिए तैयारी करते हैं। यहां कोई नियम कानून नहीं है। बल्कि छात्र अपने हिसाब से रोजाना एक टॉपिक उठाते हैं, जिसमें सबसे ज्यादा लोगों को दिक्कात। फिर उससे मिलकर निपटा जाता है।

छात्रों का कहना है कि बुंदेलखंड में शिक्षा के क्षेत्र का प्रसार होना चाहिए। उन्होंने अधिक सरकारी नौकरियों की भी मांग की है। ताकि लोगों को बेहतर। विकल्प मिल सकें। बता दें कि इस स्कूल में ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के वही लोग पढ़ते हैं जो सरकारी नौकरी या फिर पढ़ाई के लिए कोचिंग कर पाने में असमर्थ हैं। वाकई ये स्कूल देश को एक बेहतर विजन दे रहा है।

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