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उत्तराखंड विधानसभा में पेश हुआ यूसीसी, भारत मां की जय और जय श्रीराम के नारे गूंजे

Uttarakhand News: Uniform Civil code: उत्तराखंड देश का पहला राज्य बनने जा रहा है जहां यूसीसी यानि यूनिफार्म सिविल कोड लागू होगा। यूसीसी पर विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट को उत्तराखंड कैबिनेट ने मंजूर कर दिया है। इसी के साथ मंगलवार सुबह जैसे ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यूसीसी विधेयक के रुप में विधानसभा में पेश किया तो सदन भारत माता की जय, वंदे मातरम और जय श्री राम के नारे से गूंज उठा। बीजेपी विधायकों के नारों के बीच मुख्य सचिव राधा रतूड़ी और अन्य अधिकारियों के चेहरे पर खुशी देखने को मिली। हालाकि इस दौरान नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य और वरिष्ठ नेता प्रीतम सिंह ने यूसीसी के ड्राफ्ट को आननफानन में सदन में रखने और अंकिता भंडारी मर्डर केस, बागवानी घोटाला समेत कई मुद्दों पर सरकार को घेरा। ऐसे में सदन का माहौल गरमागरम होने के आसार हैं। अब तय प्रक्रिया के तहत विधेयक सदन की मंजूरी के बाद राज्यपाल के पास भेजा जाएगा। जानकारी के मुताबिक, यूसीसी केंद्रीय कानूनों से मिलता है, इसलिए इसे राजभवन अंतिम मंजूरी के लिए राष्ट्रपति भवन के जरिए केंद्रीय गृह मंत्रालय को भी भेज सकता है। जहां से मंजूरी के बाद संभावना है कि फरवरी अंत तक यूसीसी उत्तराखंड में कानून के तौर पर लागू होगा।

यूसीसी बिल को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक्स पर पोस्ट किया। उन्होंने लिखा कि देवभूमि उत्तराखंड के नागरिकों को एक समान अधिकार देने के उद्देश्य से आज विधानसभा में समान नागरिक संहिता का विधेयक पेश किया जाएगा। यह हम सभी प्रदेशवासियों के लिए गर्व का क्षण है कि हम यूसीसी लागू करने की दिशा में आगे बढ़ने वाले देश के पहले राज्य के रूप में जाने जाएंगे।

यूसीसी की प्रमुख सिफारिशों पर बात करें तो अब लड़कियों की शादी 18 साल से पहले नहीं हो पाएगी। सभी धर्मों के लोगों को शादी का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन कराना होगा। पत्नी पत्नी एक समान आधार पर ही तलाक ले सकेंगे। इसके साथ ही बहु विवाह पर भी रोक लग जाएगी। एक पत्नी या पति के जीवित रहते हुए दूसरी शादी नहीं हो सकेगी। वहीं उत्तराधिकारी के तौर पर लड़कियों को भी लड़कों के बराबर ही अधिकार होगा।

इसके साथ ही अगर पत्नी की मृत्यु हो जाती है और उसके माता पिता का कोई सहारा न हो, तो उनके भरण पोषण का दायित्व पति पर होगा। मुस्लिम महिलाओं को भी गोद लेने का अधिकार मिलेगा। गोद लेने की प्रक्रिया आसान की जाएगी। बच्चे के अनाथ होने की स्थिति में गार्जियनशिप की प्रक्रिया को आसान किया जाएगा। पति-पत्नी के झगड़े की स्थिति में बच्चों की कस्टडी उनके ग्रैंड पैरेंट्स को दी जा सकती है। फिलहाल जनसंख्या नियंत्रण को यूसीसी में शामिल नहीं किया गया है। इसके अलावा लिव इन रिलेशनशिप का सेल्फ डिक्लेरेशन भी आवश्यक होगा। बड़ी बात यह है कि उत्तराखंड में रहने वाली जनजातियों को यूसीसी के दायरे से बाहर रखा गया है।

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